गुरसर कौन्के स्थित गुरद्वारा छठी पातशाही श्री गुरु हरगोबिंद साहिब में भाकियू डकौंदा की ब्लॉक बैठक जिला अध्यक्ष मोहिंदर सिंह कुमालपुरा और ब्लॉक अध्यक्ष हरचंद सिंह ढोलण की अगुवाई में हुई। बैठक में किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़ में बड़ा धरना देने का ऐलान किया। नेताओं ने पंजाब सरकार पर किसानों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया।
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : पंजाब में किसानों और मजदूरों के तेवर एक बार फिर तीखे होने लगे हैं। गुरद्वारा छठी पाशाही श्री गुरु हरगोबिंद साहिब, गुरसर कौन्के में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) डकौंदा की ब्लॉक बैठक आयोजित की गई। जिला अध्यक्ष मोहिंदर सिंह कुमालपुरा और ब्लॉक अध्यक्ष हरचंद सिंह ढोलण की अगुवाई में हुई इस बैठक में आगामी बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। किसानों ने ऐलान किया है कि अपनी जायज और हक की मांगों को मनवाने के लिए 1 सितंबर से 7 सितंबर तक पूरे पंजाब से किसान चंडीगढ़ में बड़ा धरना देंगे।
बैठक में नेताओं ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र की नीतियों पर चल रही है और किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। किसानों ने मांग की है कि पंजाब के दरियाई पानी की रॉयल्टी और भाखड़ा बियास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए तुरंत विधानसभा में प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
इसके अलावा, किसानों ने राज्य की प्रमुख फसलों-मूंग, मक्का, बासमती, गोभी, आलू और मटर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कानूनी गारंटी के तहत दिए जाने की पुरजोर मांग की।
बैठक में यह भी मांग उठाई गई कि 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद राज्य के हर जरूरतमंद पुरुष और महिला को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिले, किसानों को पूरी तरह कर्ज मुक्त किया जाए और विवादास्पद लैंड पूलिंग नीति को तुरंत रद्द किया जाए।
1 सितंबर के 'चंडीगढ़ चलो' आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांवों स्तर पर लामबंदी तेज कर दी गई है। इस चेतावनी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।