2019 में खरीदी गई 42 एकड़ कमर्शियल जमीन को लेकर मोहाली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिकायतकर्ता के अनुसार करोड़ों के सौदे की रकम नहीं दी गई, उल्टा कंपनी और संपत्तियों पर कब्जा कर धमकियां दी गईं। पुलिस दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच में जुटी है।
मोहाली : ट्राइसिटी में जमीन से जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मोहाली के सेक्टर-65 स्थित करीब 42 एकड़ कमर्शियल जमीन पर पार्टनरशिप फर्म के जरिए कब्जा करने के आरोप में सोहाना थाना पुलिस ने तीन कारोबारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। खुले बाजार में इस जमीन की कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये आंकी जा रही है। पुलिस तीनों आरोपियों की तलाश में जुटी है।
शिकायतकर्ता पंचकूला के सेक्टर-6 निवासी शिव अग्रवाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी फर्म डीएस बिल्टेक में सबसे पहले वेद प्रकाश गर्ग और परवीन गर्ग को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दी। बाद में मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आदर्श गर्ग को भी साझेदार बनाया गया। आरोप है कि तीनों के नाम कंपनी की पूरी हिस्सेदारी ट्रांसफर करा ली गई, लेकिन तय समझौते के अनुसार उन्हें भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपियों ने फर्म और उसकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।
शिकायत के अनुसार शिव अग्रवाल ने वर्ष 2019 में मोहाली के सेक्टर-65 में 42 एकड़ जमीन खरीदी थी। वर्ष 2021 में परवीन गर्ग और वेद प्रकाश गर्ग तथा 2022 में आदर्श गर्ग को कंपनी में साझेदार बनाया गया। आरोप है कि पहले विश्वास जीतकर साझेदारी की गई और बाद में पूरी कंपनी पर कब्जा कर लिया गया।
मामले की शिकायत मिलने पर एसएसपी मोहाली के निर्देश पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच अधिकारी नरिंदर सिंह ने बताया कि जांच में धोखाधड़ी के आरोप सही पाए जाने पर थाना सोहाना में परवीन गर्ग, वेद प्रकाश गर्ग और आदर्श गर्ग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 406, 420, 465, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
शिव अग्रवाल ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने अदालत में भी जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि चार वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें सौदे की तय राशि का एक भी रुपया नहीं मिला। जब भी उन्होंने भुगतान की मांग की, उन्हें टालने के साथ-साथ धमकियां भी दी गईं। आखिरकार न्याय की उम्मीद में उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में वित्तीय लेन-देन, साझेदारी के दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।