शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट और चराईदेव सहित सात जिलों में 349 गांव अब भी प्रभावित हैं। 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है, जबकि राहत एवं बचाव के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और मेडिकल टीमें लगातार मोर्चा संभाले हुए हैं।
गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ का पानी भले ही तेजी से उतर रहा हो, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। राज्य के शिवसागर और धेमाजी जिलों में नदियों का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। सबसे अधिक तबाही शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिल रही है, जहां हजारों परिवार अब भी घर नहीं लौट पाए हैं और राहत शिविरों पर निर्भर हैं।
7 जिले अब भी बाढ़ की चपेट में
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, वर्तमान में गोलाघाट, शिवसागर, चराईदेव, बजाली, धेमाजी, शोणितपुर और जोरहाट सहित 7 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 20 राजस्व मंडलों के 349 गांव जलभराव से प्रभावित हैं, जबकि 1,78,837 लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।
कृषि पर भारी असर, वैकल्पिक खेती की तैयारी
बाढ़ के कारण 15,060 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है। हालात को देखते हुए कृषि विभाग किसानों के लिए वैकल्पिक खेती की योजना तैयार कर रहा है, क्योंकि कई क्षेत्रों में अब धान की खेती संभव नहीं रह गई है।
44 राहत शिविरों में हजारों लोगों को सहारा
राज्य सरकार की ओर से प्रभावितों के लिए 44 राहत शिविर और 17 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। राहत शिविरों में 11,489 लोग रह रहे हैं, जबकि 5,569 अन्य प्रभावितों को राहत केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।
79 मेडिकल टीमें और सुरक्षा बल मैदान में
राहत एवं बचाव कार्य में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार जुटे हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 79 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं, जबकि तीन नावों के जरिए राहत सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचाई जा रही है।
82 पर स्थिर रही मृतकों की संख्या
शनिवार को किसी नई मौत की सूचना नहीं मिली। राज्य में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 82 पर स्थिर है। हालांकि, सड़कों, पुलों और अन्य आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसकी मरम्मत और पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी है।