राजस्व विभाग ने पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं के लिए लागू की सख्त नियमावली। कम या ज्यादा मूल्यांकन, फर्जी दस्तावेज, देरी और अनुशासनहीनता पर होगी कार्रवाई। वित्त आयुक्त को जुर्माना लगाने, फीस रोकने और पैनल से बाहर करने का अधिकार दिया गया। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाना है।
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने सरकारी भूमि और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों के निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन को सुनिश्चित करने के लिए पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ताओं (Valuers) के लिए सख्त आचार संहिता लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले मूल्यांकनकर्ताओं पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। गंभीर मामलों में उन्हें पैनल से हटाने और उनकी मूल्यांकन फीस जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह नीति वर्ष 2021 में अधिसूचित व्यवस्था के तहत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की भूमि व अन्य परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
नई आचार संहिता के अनुसार प्रत्येक पैनलबद्ध मूल्यांकनकर्ता को हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम-1887, भारतीय स्टाम्प अधिनियम-1899, भूमि अधिग्रहण अधिनियम-2013, रियल एस्टेट (रेरा) अधिनियम-2016 तथा अन्य संबंधित केंद्रीय और राज्य कानूनों का पालन करना अनिवार्य होगा। साथ ही, उन्हें अपने मूल नियामक संस्थानों जैसे सेबी, आरबीआई, आयकर विभाग, भारतीय स्टेट बैंक और सरकारी बीमा कंपनियों के दिशा-निर्देशों का भी पालन करना होगा।
नीति के तहत किसी भी मूल्यांकन कार्य से पहले 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) की घोषणा देना अनिवार्य किया गया है। बदलती कानूनी और पेशेवर जरूरतों के अनुसार इस आचार संहिता की हर दो वर्ष में समीक्षा भी की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर कम या अधिक मूल्यांकन करना, फर्जी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करना, पेशेवर कदाचार, फर्जी बिल लगाना, तय समय पर रिपोर्ट जमा न करना या सरकारी अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार जैसे मामलों में संबंधित मूल्यांकनकर्ता के खिलाफ कार्रवाई होगी। यदि किसी मूल्यांकनकर्ता का पंजीकरण उसकी मूल नियामक संस्था द्वारा निलंबित या रद्द कर दिया जाता है, तो उसे स्वतः पैनल से हटा दिया जाएगा।
नीति में शिकायत निवारण की व्यवस्था भी की गई है। शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग का प्रशासनिक सचिव मामला राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेजेगा, जिसके बाद जांच अधिकारी दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपनी रिपोर्ट देगा। अंतिम कार्रवाई का अधिकार वित्त आयुक्त के पास होगा, जो उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ मूल्यांकन शुल्क जब्त करने और पैनल से हटाने का निर्णय ले सकेंगे। जुर्माने की वसूली हरियाणा भू-राजस्व अधिनियम, 1887 के तहत भू-राजस्व बकाया की तरह की जाएगी।