विदेश भेजने के नाम पर कथित वीजा धोखाधड़ी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने की मांग करने वाले आरोपी को अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। 15 दिन में पांच अखबारों में नोटिस प्रकाशित कर उसकी प्रतियां अदालत में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चंडीगढ़ (अजीत झा.) : विदेश भेजने के नाम पर कथित ठगी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और वीजा धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग पर सुनवाई के दौरान अनोखा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि आरोपी समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करवाना चाहता है तो उसे अपने खर्च पर पंजाब के कम से कम पांच प्रमुख समाचार पत्रों में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों का सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कराना होगा। इनमें कम से कम दो पंजाबी भाषा के समाचार पत्र शामिल होना अनिवार्य होगा।
जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें पक्षकारों के बीच हुए समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल दो पक्षों के बीच आर्थिक लेन-देन का नहीं है, बल्कि विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लोगों को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिनका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक नोटिस में आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और आपराधिक मामलों का पूरा विवरण देना होगा। इसमें लंबित मामले, जिनका निपटारा हो चुका है, पहले रद्द किए गए मामले और विदेश भेजने, फर्जी वीजा, फर्जी दस्तावेज या धोखाधड़ी से जुड़े वे मामले भी शामिल होंगे, जिनमें बाद में पीड़ितों को रकम लौटाकर समझौता कर लिया गया हो।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी है और इसे छिपाया नहीं जा सकता। इसलिए केवल समझौते के आधार पर राहत देने से पहले यह आवश्यक है कि संभावित पीड़ितों और आम जनता को आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध हो।
हाईकोर्ट ने आरोपी को 15 दिनों के भीतर पांच समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित कराने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई से पहले प्रकाशन की प्रतियां और अनुपालन संबंधी शपथपत्र अदालत में दाखिल करने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस में आरोपी का नाम, पता, संपर्क विवरण और उसके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्यौरा होगा तथा यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा कि यह प्रकाशन पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में किया जा रहा है।