पहला बैच तैयार, निर्यात ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद; फिलीपींस के बाद वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी दिखाई रुचि
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित नए उत्पादन केंद्र के शुरू होने के बाद ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के उत्पादन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। नए प्लांट में मिसाइलों का पहला बैच तैयार हो चुका है, जिससे उत्पादन क्षमता और निर्माण की गति दोनों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे वैश्विक बाजार में निर्यात ऑर्डर भी बढ़ेंगे।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना फरवरी 1998 में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस की एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम के रूप में हुई थी। कंपनी में भारत की 50.5 प्रतिशत और रूस की 49.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह दुनिया की चुनिंदा रक्षा कंपनियों में शामिल है, जो मिसाइलों के डिजाइन, उत्पादन, विपणन, निर्यात और बिक्री के बाद रखरखाव तक की पूरी प्रक्रिया स्वयं संभालती है।
कंपनी वर्तमान में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्माण करती है, जिसे पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और भूमि आधारित प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। करीब मैक 2.8 की गति से उड़ान भरने वाली यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसके उन्नत संस्करणों की मारक क्षमता 800 किलोमीटर तक है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस अब अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने पर भी काम कर रही है।
कंपनी के देशभर में चार उत्पादन केंद्र हैं, जिनमें लखनऊ सबसे नई इकाई है। इसके अलावा हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम और राजस्थान के पिलानी में भी उत्पादन केंद्र संचालित हैं। लखनऊ प्लांट के शुरू होने से कुल उत्पादन क्षमता में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह-निदेशक अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने बताया कि लखनऊ इकाई से पहला मिसाइल बैच तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि नई फैसिलिटी के संचालन से उत्पादन की रफ्तार और क्षमता दोनों बढ़ी हैं, जिससे भविष्य में निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश बन चुका है, जबकि वियतनाम और इंडोनेशिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अन्य देशों ने भी इस मिसाइल प्रणाली में गहरी रुचि दिखाई है। कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 5,200 करोड़ रुपये का राजस्व भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत होती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है।