चंडीगढ़/यूटर्न/12 जून। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में ज़बरदस्त तेज़ी आई और हफ़्ते का समापन मज़बूती के साथ हुआ। इसकी वजह थी यूएस-ईरान के बीच शांति समझौते की संभावना की खबरें, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई में रुकावट कम होने की उम्मीद जगी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स 1,695.40 अंक या 2.3 प्रतिशत उछलकर 75,527.95 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 461.30 अंक या 1.99 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 23,622.90 पर बंद हुआ। बाज़ार की शुरुआत ही ज़बरदस्त तेज़ी के साथ हुई; शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 900 अंक से ज़्यादा और निफ्टी 250 अंक से ज़्यादा ऊपर चढ़ा और पूरे सेशन के दौरान यह बढ़त बनी रही।
यूएस-ईरान बातचीत में प्रगति
यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की बातचीत में प्रगति हुई है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल मेहर न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, समझौते के ड्राफ्ट में 14 प्रावधान शामिल हैं, जिनमें 30 दिनों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ईरान की फ्रीज़ की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करना और परमाणु मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत करना शामिल है। जी7 के एक अधिकारी ने कहा कि रविवार तक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इन घटनाक्रमों से 100 दिनों से ज़्यादा समय से चल रहे युद्ध के खत्म होने की उम्मीद जगी है। यह युद्ध 28 फरवरी को यूएस और इज़राइल द्वारा ईरान पर बिना किसी उकसावे के किए गए हमले के साथ शुरू हुआ था। तब से इसने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को बाधित कर रखा है।
तेल की कीमतों में भारी गिरावट
शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई। इसकी वजह यह उम्मीद थी कि समझौते से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (जो ग्लोबल ऑयल और गैस शिपमेंट के लिए एक अहम रास्ता है) फिर से खुल सकता है। इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.5 प्रतिशत गिरकर 86.31 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि यूएस क्रूड 4.3 प्रतिशत गिरकर 83.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, स्पॉट गोल्ड 0.2 प्रतिशत बढ़कर 4,221.46 डॉलर प्रति औंस हो गया।
बाज़ार में तेज़ी क्यों आई?
इस तेज़ी की मुख्य वजह तेल की कीमतों में भारी गिरावट थी। मार्च में ईरान में हुए टकराव की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद हो गया था, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं और दुनिया भर में महंगाई का दबाव भी बढ़ गया। अगर इस जलमार्ग के फिर से खुलने के कोई संकेत मिलते हैं, तो बाज़ार इसे सकारात्मक रूप से देखते हैं क्योंकि इससे सप्लाई की कमी की चिंता कम होती है। तेल की कम कीमतें भारत के लिए खास तौर पर फायदेमंद हैं, क्योंकि भारत अपनी ज़्यादातर कच्चे तेल की ज़रूरतें आयात से पूरी करता है।
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