चंडीगढ़/यूटर्न/27 मई। पंजाब भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलों का दौर तेज़ हो गया है। राजनीतिक गलियारों में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चर्चाएं ज़ोरों पर हैं। हालांकि, पार्टी सूत्र इस मामले में अभी खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू इस समय केंद्र सरकार में रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री हैं और राजस्थान से राज्यसभा सांसद भी हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद से वे पंजाब में पार्टी के प्रमुख सिख चेहरों में उभरकर सामने आए हैं। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें पंजाब में बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है। इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला है जब भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से अलग होने के बाद पंजाब में अपना स्वतंत्र जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अब अपने पारंपरिक शहरी वोट बैंक से आगे बढ़कर ग्रामीण और सिख समुदाय में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत एक प्रभावशाली सिख चेहरे को आगे लाने की कवायद चल रही है।
अभी तक कोई बदलाव नहीं
पंजाब भाजपा का नेतृत्व पहले अश्वनी शर्मा और सुनील जाखड़ जैसे नेता संभाल चुके हैं। ऐसे में बिट्टू को लेकर चल रही चर्चाओं को पार्टी के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विस्तार की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि पंजाब नेतृत्व को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल प्रदेश संगठन मौजूदा ढांचे के तहत ही काम कर रहा है और केंद्रीय नेतृत्व सीधे तौर पर राज्य इकाई की निगरानी कर रहा है।
भाजपा रणनीति पर काम कर रही
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही अभी कोई औपचारिक घोषणा न हुई हो, लेकिन बिट्टू को लेकर चल रही चर्चाएं इस बात का संकेत हैं कि भाजपा पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नई नेतृत्व रणनीति पर काम कर रही है। पंजाब में सिख वोट बैंक लगभग 55 से 60 प्रतिशत माना जाता है। ऐसे में पार्टी को लगता है कि किसी मजबूत सिख चेहरे के नेतृत्व में वह राज्य की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों में बेहतर संतुलन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू को इसी रणनीति के तहत एक प्रभावशाली और संतुलित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
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