चंडीगढ़/यूटर्न/24 मई। हरियाणा सरकार ने राज्य में सरकारी कामकाज करने के लिए फेडरल बैंक, आईडीबीआई बैंक और डीसीबी बैंक सहित कई बैंकों की एम्पेनलमेंट (सूची में शामिल होने की अनुमति) वापस ले ली है, और 12 जुलाई, 2024 की बैंक एम्पेनलमेंट नीति के ढांचे को फिर से लागू कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अरुण गुप्ता द्वारा 18 मई को जारी निर्देशों में कहा गया है कि 12 जुलाई, 2024 के एम्पेनलमेंट निर्देशों के बाद एम्पेनलमेंट और जमा निवेश की सीमा बढ़ाने के संबंध में लिए गए सभी निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए जाते हैं। गुप्ता ने कहा, समय-समय पर मिलान सुनिश्चित करने के लिए, उसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉज़िट का नवीनीकरण प्रतिबंधित होगा। मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम किसी अन्य पैनल में शामिल बैंक में जमा की जाएगी, भले ही वहां मिलने वाली ब्याज दर थोड़ी कम ही क्यों न हो। कोटेशन मंगाने से पहले कम से कम तीन कार्य दिवसों का नोटिस दिया जाएगा।
समिति की सिफारिशों पर लिया फैसला
वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ये फैसले राज्य की बैंकिंग नीति और अनाधिकृत फंड ट्रांसफर पर बनी उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिए गए हैं। गुप्ता की अध्यक्षता में गठित इस समिति का उद्देश्य आईडीएफसी फस्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से सरकारी फंड के कथित अनाधिकृत ट्रांसफर की जांच करना और राज्य की बैंकिंग नीति की समीक्षा करना था।
समिति को सौंपे थे कई कार्य
समिति को आईडीएफसी फस्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया की जांच करने; विभिन्न विभागों द्वारा इन बैंकों में बड़ी मात्रा में सरकारी फंड जमा करने के फैसलों की समीक्षा करने; सरकारी विभागों द्वारा खातों का मिलान न किए जाने से संबंधित मुद्दों को देखने; और इस संबंध में किसी भी प्रकार की चूक, प्रक्रियागत कमियों या प्रणालीगत विफलताओं का पता लगाने का कार्य सौंपा गया था।
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