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यदि तुम्हें संसार के विष रूपी कड़वे वचन भी सुनने को मिलें, तो उन्हें हृदय में न उतारो, बल्कि गले में ही रोक लो/साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती डी.ए.वी. बी.एड. कॉलेज , होशियारपुर में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन संत कृपाल दास के अंतिम दर्शन के लिए हजारों संगतें हुईं नतमस्तक श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में 1101 कुंडीय अति रुद्र महायज्ञ के सहयोगियों का भव्य सम्मान समारोह आयोजित वास्तु दूषित भवन में वहम का बोलबाला हमेशा रहेगा -डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री होशियारपुर पुलिस ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर की प्रतिमा के बेअदबी मामले को सुलझाया बिल्डिंग मालिक ने ब्यूटीशियन कोर्स कंपनी के मालिक पर लगाए गंभीर आरोप, पुलिस को दी शिकायत पाकिस्तान से अमृतसर आई 450 करोड़ की ड्रग्स, कार में रखकर सप्लाई करने जा रहे थे, 2 तस्कर गिरफ्तार विश्व लीवर दिवस 2026: ‘द लैंसेट’ ने विश्व स्तर पर लीवर बीमारियों में वृद्धि की चेतावनी दी, पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत तैयारी तेज की, स्क्रीनिंग का विस्तार पटियाला के ड्राइवर की मां ने कैंसर को हराया ; मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी मुश्किल समय की सहारा पंजाब के स्कूलों में ए.आई. को मुख्य विषय के रूप में शामिल किया जाएगा; बोर्ड के सर्टिफिकेट में दर्ज होंगे प्राप्त किए अंक अमृतसर के अटारी विधानसभा क्षेत्र की सभी प्रमुख सड़कें शानदार बनेंगी, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रखी आधारशिला
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भाग्यवान भवन का निर्माण करता है सौभाग्यवान वास्तु के अनुरूप भवन का निर्माण करवाता है और जिसका भाग्य साथ नहीं देता है वो व्यक्ति भवन निर्माण में अनेक त्रुटियां कर बैठता है,वही त्रुटियां उसके विनाश का कारक भी बन जाती है ऐसा मानना है अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री का ।भवन में अगर ईशान कोण दूषित तो स्वास्थ्य के साथ शिक्षा का वहम ,पूर्व दूषित तो सरकार से भय,आग्नेय कोण के वास्तु दोष उधारी डुबाने का भय,दक्षिण नेम फेम की कमी का भय पश्चिम के दोष अकारण चिंता,नफा नुक़सान का वहम वायव्य दूषित तो शत्रु भय उतर दूषित तो नए आयाम को कैसे स्थापित करें और अवसरों को कैसे भुनाए इस बात का भय इन सभी दोषों में नेरीत्य कोण दूषित है तो वहम की शब्दो में बांध नही सकते यथा कही मुझे पुलिस पकड़ लेगी।कहीं मैं गंभीर बीमारी की चपेट में तो नहीं आ गया ।कहीं मेरा व्यापार तो चौपट नहीं हो जायेगा।कहीं मेरे उपर ऊपरी हवा का दोष तो नहीं।कहीं मेरी ईकाई की दिशा तो गलत नहीं।कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं होगी।किसी ने घर पर राई तो नहीं फेंक दी।कहीं मेरे घर पर प्रेत बाधा तो नहीं ।कहीं मेरी कुंडली में दोष तो नहीं।इस प्रकार के अनगिनत वहम दिलों दिमाग़ में रहते हैं और व्यक्ति का जीवन नारकीय बन जाता है ।