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अशोक सहगल लुधियाना यूटर्न 14 अप्रैल : राज्य के सिविल अस्पतालों में मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी पर कार है वर्तमान में भी 50% से अधिक पद खाली बताए जाते हैं जहां तक एमबीबीएस डॉक्टरों की संख्या का सवाल है पिछले समय में सरकार द्वारा 1000 डॉक्टरों की भर्ती करने के बावजूद अभी भी 30% के लगभग एमबीबीएस पोस्टिंग खाली बताई जाती है विशेषज्ञों का कहना हैं कि यह सिस्टम फैलियर की कहानी है जिसके चलते डॉक्टर ही नहीं स्टाफ नर्सो फार्मासिस्ट तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की संख्या भी सरकार से कभी पूरी नहीं हो पाई है सरकार द्वारा सिविल अस्पतालों को मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने और कॉर्पोरेट अस्पतालों के बराबर बनाने की बात की जाती है स्टाफ नर्सिस, फार्मासिस्ट अन्य कर्मचारी भी शार्ट कई सरकारों के आने-जाने के बाद भी कोई भी सरकार डॉक्टरों तथा स्टाफ की कमी पूरी नहीं कर पाई है उदाहरण के तौर पर लुधियाना के सिविल अस्पताल में डॉक्टरो के लगभग 30 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं और एक भी रेगुलर स्पेशलिस्ट तैनात नहीं है इसके अलावा 100 के करीब स्टाफ नर्सो की कमी है मेडिकल स्पेशलिस्टो की कमी नहीं हो रही पूरी सिविल अस्पताल में कई वर्षों से कोई मेट्रन तैनात नहीं रही और ना ही नर्सिंग सुपरीटेंडेंट तैनात की गई है इसी तरह लेबोरेटरी टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, डेंटल, रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की बेहद कमी है सरकार की उदासीनता को देखते हुए कई मेडिकल्स स्पेशलिस्ट कॉर्पोरेट अस्पतालों में चलें गये रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर भी बहुत कम मेडिकल स्पेशलिस्ट है जो दोबारा सरकारी अस्पतालों में काम करने के लिए तैयार होते हैं उपकरणों की मेंटेनेंस कौन करेगा सिविल अस्पतालों में लगाए गए उपकरणों मशीनों आदि की मेंटेनेंस समय पर नहीं कराई जाती जिसके कारण यह हद से होने का खतरा बना रहता है इसमें आलम यह है कि अगर दवाई है तो डॉक्टर नहीं अगर वेंटीलेटर है तो चलाने के लिए टेक्निकल स्टाफ नहीं इसलिए किसी का भी काम कोई भी करने के लिए सामने आ जाता है या नॉन टेक्निकल व्यक्ति को ही टेक्निकल का काम सौंप दिया जाता है सिविल अस्पताल बनने लगे रेफरल सेंटर सिविल अस्पताल मल्टीस्पेशलिटी अथवा कॉर्पोरेट अस्पतालों की तर्ज पर काम करने की बजाय रेफरल अस्पताल बनते जा रहे हैं अधिकतर गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है जिनमे निजी अस्पताल भी शामिल है हाल ही में लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के लिए सिविल अस्पताल लुधियाना द्वारा एक निजी अस्पताल से करार किया गया है इसके अलावा 400 बच्चों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा चुका है। लोगों का कहना है कि मैं सीनियर मेडिकल ऑफिसर के आने के बाद हालत पहले से बेहतर हुए हैं डॉक्टरो व स्टाफ की कमी का ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की माने तो जिले के सरकारी अस्पतालों में 100 से अधिक स्टाफ नर्स की जरूरत है जबकि 150 के करीब डॉक्टर और होने चाहिए ऐसा माना जा रहा है इसके अलावा 10 फार्मासिस्ट यही नहीं अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं के लिए डॉक्टरों की पूर्ण रूप से तैनाती कई वर्षों से नहीं की गई गढ़ वर्ष भी है मामला सामने आया था कि 30 इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसरो के बावजूद 8 की तैनाती की गई थी बताया जाता है कि यह संख्या आज भी पूरी नहीं हुई इसी तरह सिविल अस्पताल लुधियाना खन्ना तथा जगराओं में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी बरकरार है विश्व स्वास्थ्य संगठन अगर 1000 लोगों पर एक डॉक्टर की तैनाती की बात भी करे तो 11000 पर भी एक डाक्टर तैनात नहीं है इसी क्रम में विशेषज्ञों की कमी की बात करें तो एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डेंटल सर्जन तथा शिशु रोग विशेषज्ञ, छाती के रोगों के विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञों की कमी बरकरार हैं इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में न्यूरोलॉजी तथा हृदय रोग विशेषज्ञों का मुंह देखना अभी बाकी है शायद सरकारी अस्पतालों के कॉरपोरेट अस्पताल बनने के बाद यह कमी भी पूरी हो जाए।