Buy High Quality BacklinksNettoyage professionnel en SavoieInstant URL Indexingcasino link building servicesbuy cheap backlinkWebshellfast google indexingBuy hidden backlinksPremium Backlinks for SEObuy backlinkshacklink satin alBuy Hidden Backlinkchambery porn
CAG रिपोर्ट में पंजाब की जेलों की पोल खुली: 6 साल की देरी से बिगड़ी व्यवस्था, कैदियों को नहीं मिली बुनियादी सुविधाएं - Uturn Time
Uturn Time
Breaking
Mohali: मोहाली में नए स्कूलों के लिए गमाडा की पहल, तीन शैक्षणिक प्लॉट ई-नीलामी पर Chandigarh: चंडीगढ़ में 12 नए वेंडिंग जोन पर शुक्रवार को होगा फैसला, व्यापारियों की आपत्तियों पर होगी चर्चा जीएम को किया सस्पेंड, जांच जारी, कई और लोगों पर भी गिर सकती है गाज पंजाब के बाद हरियाणा में भी कांग्रेस का मुकाबला कांग्रेस से ऐसा भी होता है: बैंक ऑफ बड़ौदा का 5,700 करोड़ का अदालत के बाहर सबसे महंगा समझौता तस्करों का पीछा करते हुए पुलिस की गाड़ी दीवार से टकराई, एसएचओ गंभीर जख्मी Bathinda: बठिंडा हिरासत मौत मामला: इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या के आरोप तय Chandigarh: पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपलों की पदोन्नति का रास्ता साफ, हाई कोर्ट ने हटाई रोक Chandigarh:पंजाब में मतदाता सूची अपडेट अभियान तेज, 11-12 जुलाई को सभी बूथों पर लगेंगे विशेष शिविर: सीईओ अनिंदिता मित्रा Chandigarh: पंजाब में बच्चों के भविष्य की नई नींव, 892 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र तैयार Chandigarh: पंजाब में बच्चों के भविष्य की नई नींव, 892 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र तैयार Fazilka: फाजिल्का में पुलिस का मुंशी हेरोइन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार, चौकी इंचार्ज भी निलंबित
Logo
Uturn Time
चंडीगढ़/ यूटर्न/ 18 मार्च।नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने पंजाब की जेल व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र द्वारा जारी मॉडल जेल मैनुअल 2016 को लागू करने में राज्य सरकार ने करीब छह साल की देरी की, जिससे जेलों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां ये दिशा-निर्देश 2016 में जारी हुए थे, वहीं पंजाब में इन्हें 2022 में लागू किया गया। इस देरी का सीधा असर कैदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं—जैसे स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक जीवन—पर पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। जेल अस्पतालों में 72% बेड और 60% मेडिकल स्टाफ की कमी है। इसी कारण 45,497 कैदियों को इलाज के लिए बाहरी अस्पतालों में भेजना पड़ा, जिनमें से 22 कैदी फरार भी हो गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। 74% पुरुष और 63% महिला बैरकों में पर्याप्त शौचालय नहीं हैं। कई जेलों में कपड़े धोने की मशीनें और बायलर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। वहीं, 39% जेलों में पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच तक नहीं कराई गई। महिला कैदियों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कई जगहों पर सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, जेलों के निर्माण और अपग्रेडेशन में देरी, जैसे नाभा जेल का मामला, प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जेल सुधारों को लेकर तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि कैदियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।