प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दैनिक सुभाषितम् में ऋग्वेद के प्रसिद्ध मंत्र 'समानी व आकूतिः...' को साझा किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही भारत निरंतर आगे बढ़ सकता है। मंत्र के माध्यम से उन्होंने लोगों से अपने विचार और संकल्प एक दिशा में रखने, एक-दूसरे के साथ सहयोग करने तथा समान व्यवहार की भावना अपनाकर समाज और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की अपील की।
नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ऋग्वेद के एक प्राचीन मंत्र को साझा करते हुए देशवासियों को सामूहिक संकल्प, एकता और सहयोग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और समृद्धि के लिए सभी का एकजुट होकर आगे बढ़ना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।”
ऋग्वेद के मंत्र से एकता का संदेश
प्रधानमंत्री ने जिस सुभाषितम् को साझा किया, वह ऋग्वेद के मंडल 10, सूक्त 191, मंत्र 4 से लिया गया है—
“समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥”
इस मंत्र के माध्यम से समाज में साझा उद्देश्य, समान सोच और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया है।
‘हमारे मन एकता के भाव से जुड़े हों’
प्रधानमंत्री के एक्स हैंडल पर मंत्र का भावार्थ भी साझा किया गया। इसमें कहा गया कि सभी लोगों के संकल्प एक समान हों और उनके मन एकता की भावना से जुड़े रहें, ताकि वे परस्पर सहयोग और समान व्यवहार के साथ समाज की उन्नति के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
देश की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर
प्रधानमंत्री के संदेश का मूल भाव यह है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि साझे लक्ष्य और सामूहिक प्रयास में निहित होती है।
उन्होंने प्राचीन वैदिक संदेश को वर्तमान भारत की विकास यात्रा से जोड़ते हुए एकता को राष्ट्रीय प्रगति और समृद्धि की आधारशिला बताया।