असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार के संकेत हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में मुश्किलें बरकरार हैं। गोलाघाट, शिवसागर, नगांव, धेमाजी और जोरहाट के 170 गांवों में लोग प्रभावित हैं। राहत कार्यों में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन दल जुटे हैं। रविवार को 18 मेडिकल टीमें और चार नावें तैनात रहीं। नावों से 109 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत जारी है।
गुवाहाटी : असम में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य की सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है, लेकिन बाढ़ की मार अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। राज्य के पांच जिलों में अब भी 170 गांव और 51,869 लोग प्रभावित हैं।
बाढ़ का पानी उतरने के साथ विस्थापित परिवार अब अपने घरों और खेतों की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कई इलाकों में क्षतिग्रस्त सड़कें, पुल और कृषि भूमि लोगों की वापसी में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
5 जिलों में अब भी बाढ़ का असर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 16 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, गोलाघाट, शिवसागर, नगांव, धेमाजी और जोरहाट जिलों के 14 राजस्व मंडलों के 170 गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
कुल 51,869 नागरिक बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि 3,628.17 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है।
इस बार बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों में दर्ज किया गया है।
105 लोगों की जा चुकी है जान
हालात में सुधार के बावजूद इस वर्ष की बाढ़ ने भारी मानवीय क्षति पहुंचाई है। अब तक 105 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन के सामने अब बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और खेती को दोबारा पटरी पर लाने की चुनौती है।
नावों से 109 लोगों को सुरक्षित निकाला
राहत और बचाव अभियान में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और अग्निशमन विभाग समेत कई एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।
रविवार को प्रभावित इलाकों में 18 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया। वहीं चार नावों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया। इनके जरिए 109 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
सड़क-पुलों की तबाही बनी बड़ी चुनौती
बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। पानी उतरने के बाद इन इलाकों में संपर्क व्यवस्था बहाल करना प्रशासन की बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
सरकार लगातार समीक्षा बैठकें कर क्षतिग्रस्त ढांचे का आकलन और मरम्मत की तैयारियों की निगरानी कर रही है।
पानी उतरा, लेकिन मुश्किलें बाकी
असम में बाढ़ का पानी भले ही तेजी से उतर रहा हो, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। घर लौटना, खेतों को दोबारा तैयार करना और टूटे संपर्क मार्गों को बहाल करना अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। प्रशासन का दावा है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।