बाढ़ की स्थिति में सुधार के साथ प्रभावित लोग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौट रहे हैं और क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत व सफाई तेज हो गई है। धनसिरी नदी नुमलीगढ़ में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। राज्य में 38 राहत शिविर और 32 वितरण केंद्र सक्रिय हैं। नावों से 119 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि बाढ़ में अब तक 104 मौतें दर्ज हैं।
गुवाहाटी (Naren Danu) :असम में बाढ़ का कहर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। कई इलाकों में पानी उतरने के बाद राहत शिविरों में रह रहे लोग अब अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। हालांकि, राज्य के सात जिलों में 370 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं और 77,542 लोग प्रभावित हैं। धनसिरी नदी का जलस्तर नुमलीगढ़ में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 13 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से राज्य में अब तक 104 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में गोलाघाट, शिवसागर, नगांव, होजाई, जोरहाट, दरंग और लखीमपुर जिले प्रभावित हैं। इन जिलों के 22 राजस्व मंडलों के 370 गांवों में बाढ़ का असर बना हुआ है।
बाढ़ के कारण 9,908.85 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है। प्रभावित लोगों के लिए 38 राहत शिविर और 32 राहत वितरण केंद्र अब भी संचालित किए जा रहे हैं। राहत शिविरों में फिलहाल 6,639 लोग शरण लिए हुए हैं।
घर लौट रहे लोग, मरम्मत का काम तेज
पानी घटने के साथ प्रभावित परिवारों ने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया है। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और घरों की साफ-सफाई का काम भी तेज हो गया है। सरकारी एजेंसियों के साथ निजी स्तर पर भी प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और उनकी मदद करने का प्रयास जारी है।
शिवसागर जिले में बाढ़ से 125 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 10 पक्के मकानों को भी पूरी तरह नुकसान पहुंचा है। सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है।
59 मेडिकल टीमें मैदान में
सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए गुरुवार को 59 मेडिकल टीमें तैनात कीं। राहत अभियान में पांच नावें भी लगाई गईं। इनके जरिए 119 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
राहत और बचाव अभियान में एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन और नागरिक सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षित स्वयंसेवक लगातार जुटे हुए हैं।
प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार समीक्षा बैठकें कर प्रभावित इलाकों की स्थिति और राहत कार्यों की प्रगति का जायजा ले रही है।