धनसिरि नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में हालात सबसे गंभीर बने हुए हैं। 55 राहत केंद्र संचालित, मेडिकल टीमें और नावें राहत कार्य में लगीं। बाढ़ से सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ का संकट पूरी तरह टला नहीं है। राज्य के सात जिले अब भी गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जहां लाखों लोगों का जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। सबसे खराब हालात शिवसागर जिले के हैं, जहां कई इलाकों में घरों और सड़कों पर अब भी पानी और कीचड़ जमा है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चराईदेव, शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, बिश्वनाथ, जोरहाट और लखीमपुर जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के 380 गांवों की 1,28,071 आबादी प्रभावित हुई है, जबकि 14,230.148 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है।
हालात अब भी गंभीर
धनसिरि नदी नुमालीगढ़ क्षेत्र में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
शिवसागर जिले से दो और शव मिलने के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा 2 अगस्त से ऊपरी असम में डेरा डालकर राहत और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
राहत अभियान जारी
राज्य में 38 राहत शिविर और 17 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
राहत शिविरों में 11,066 लोग शरण लिए हुए हैं।
184 लोग राहत वितरण केंद्रों से सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
राहत कार्य में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, एयर फोर्स, पुलिस और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से अभियान चला रहे हैं।
स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर फोकस
प्रभावित क्षेत्रों में 76 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।
राहत एवं बचाव के लिए 23 नावें लगातार संचालन में हैं।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए सरकार लगातार समीक्षा कर रही है।
बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन ऊपरी असम के कई इलाकों में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। प्रशासन राहत, पुनर्वास और आधारभूत ढांचे को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है।