यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि मानसिक बीमारी और बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित लोगों को गरिमापूर्ण जीवन का अवसर मिलना चाहिए; विशेषज्ञों और अभिभावकों के साथ संवाद में पुनर्वास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और दीर्घकालिक देखभाल को प्रभावी बनाने पर हुआ मंथन।
चंडीगढ़: पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मंगलवार को कहा कि मानसिक बीमारी से उबर रहे और बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित लोगों को केवल इलाज नहीं, बल्कि सम्मान, सामाजिक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने समाज से ऐसे लोगों के प्रति संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
सेक्टर-31 स्थित ग्रुप होम में सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशासक ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, बौद्धिक दिव्यांगता और ऑटिज्म को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति गरिमा और समान अधिकारों का हकदार है।
कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक प्रताप सिंह, सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव अनुराधा एस. चागटी, मुख्य अभियंता सी.बी. ओझा सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, ट्राइसिटी के मनोचिकित्सक, अभिभावक और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रशासक ने कहा कि ग्रुप होम जैसी संस्थाओं में केवल रहने की सुविधा ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित देखभालकर्ता, विशेष शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी समग्र सेवाएं उपलब्ध होना जरूरी है। उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली और परिवारों के साथ निरंतर संवाद पर भी जोर दिया।
उन्होंने सामाजिक कल्याण विभाग, जीएमसीएच-32, जीआरआईआईडी और अन्य सहयोगी संस्थानों से ग्रुप होम सेवाओं की नियमित समीक्षा करने तथा अभिभावकों और लाभार्थियों के सुझावों के आधार पर इन्हें और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक नवीन ने ग्रुप होम की कार्यप्रणाली, पात्रता, प्रवेश प्रक्रिया और पुनर्वास सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, काउंसलिंग, जीवन कौशल प्रशिक्षण, मनोरंजन गतिविधियां, पारिवारिक परामर्श और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की निगरानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पुरुष और महिला निवासियों के लिए अलग-अलग आवास की व्यवस्था भी की गई है।
जीएमसीएच-32 के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजीत सिदाना ने विशेषज्ञ सत्र में मानसिक स्वास्थ्य और दिव्यांगता से जुड़े मामलों में समय पर पहचान, निरंतर उपचार और परिवार की सक्रिय भागीदारी को सफल पुनर्वास की कुंजी बताया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवाद सत्र में अभिभावकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने ग्रुप होम की प्रवेश प्रक्रिया, पुनर्वास सेवाओं और दीर्घकालिक देखभाल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। अधिकारियों ने सुझावों पर गंभीरता से विचार कर सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने का भरोसा दिया।