लुधियाना/यूटर्न/25 जून। देश में बढ़ते हीटवेव (लू) के प्रभाव को कम करने और शहरों को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप बनाने के लिए द नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ अरबन अफेयर्स (एनआईयूए) ने देश के 12 चुनिंदा शहरों में शामिल किया है। जिसमें लुधियाना को भी सिलेक्ट किया गया है। यह हीट-रेज़िलिएंस पायलट प्रोजेक्ट है, जिसके तहत शहर में गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए कई आधुनिक उपाय किए जाएंगे। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से नगर निगम लुधियाना को 5 करोड़ की राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत शहर में कूल और ग्रीन रूफ (ठंडी और हरित छतें), सार्वजनिक स्थानों पर छायादार क्षेत्र, अतिरिक्त जल आपूर्ति केंद्र और सार्वजनिक शौचालयों का विकास किया जाएगा। साथ ही मौसम निगरानी प्रणाली को भी अपग्रेड किया जाएगा। लुधियाना में शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट शहरी गर्मी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र को संरक्षित करने से ही संभव है।
15 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकार ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य लुधियाना जैसे औद्योगिक शहरों को हीट-रेज़िलिएंट सिटी के रूप में विकसित करना है। यह योजना लगभग 15 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर के विभिन्न जोन में तापमान और हरियाली का स्तर अलग-अलग है। उदाहरण के लिए जोन डी में हरियाली अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि जोन ए,बी और सी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा है। ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर राहत पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कमजोर वर्गों को प्राथमिकता
इस योजना का सबसे बड़ा फोकस उन लोगों पर होगा, जो एयर कंडीशनर या कूलर जैसी सुविधाएं नहीं ले पाते। उनके लिए सार्वजनिक स्थानों पर छायादार और ठंडे वातावरण वाले क्षेत्र विकसित किए जाएंगे ताकि गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके। योजना के तहत पहले शहर में हीट-स्टेस हॉटस्पॉट की पहचान के लिए एक बेसलाइन सर्वे भी किया जाएगा, जिससे यह तय किया जाएगा कि किन इलाकों में सबसे ज्यादा गर्मी का असर है।
आधुनिक तकनीक से गर्मी पर नियंत्रण की कोशिश
इस आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक योजना और नवाचार के माध्यम से शहर में बढ़ते तापमान के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मानना है कि यह योजना शहरी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करेगी और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पर्यावरण प्रेमियों ने उठाए सवाल
हालांकि इस योजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि यह अच्छी पहल है, लेकिन असली समस्या यह है कि शहरों में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) लगातार कम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पेड़ों और हरियाली को काटकर विकास किया जाता है, तो फिर बाद में ऐसे प्रोजेक्ट शुरू करने का क्या लाभ है। उनके अनुसार कुछ छतों पर हरियाली लगाने से पूरे शहर की गर्मी की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
----