अंतरिम शांति समझौते का कांग्रेस ने किया स्वागत, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद
नई दिल्ली: कांग्रेस ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि पार्टी ने कहा है कि इस समझौते से भारत को तत्काल कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद मूलभूत चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन उम्मीद है कि अमेरिका, ईरान और इजराइल सभी इसका पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान ने संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक प्रारंभिक समझौते की घोषणा की है, जबकि अंतिम हस्ताक्षर और विस्तृत शर्तें अभी सामने आनी बाकी हैं।
अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार
जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव से पहले भी भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उन्होंने दावा किया कि रुपया लंबे समय से दबाव में है और डॉलर की मांग तथा आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि निजी निवेश की रफ्तार कई वर्षों से धीमी बनी हुई है। उनके अनुसार वास्तविक मजदूरी में ठहराव, चीन से बढ़ते आयात के कारण व्यापार घाटा तथा एमएसएमई क्षेत्र पर बढ़ता दबाव इसके प्रमुख कारण हैं।
निवेश माहौल पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कर विभाग और जांच एजेंसियों को मिली व्यापक शक्तियों के कारण निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है। पार्टी का कहना है कि इससे देश में निवेश का वातावरण कमजोर पड़ा है और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
पाकिस्तान और चीन को लेकर चिंता
विदेश नीति के मुद्दे पर जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाया है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन रही है।
शांति समझौते पर वैश्विक नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी अधिकारियों ने हाल ही में एक प्रारंभिक शांति समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते पर इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रहेगी।
कांग्रेस का कहना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता का भारत के ऊर्जा आयात, व्यापार और सामरिक हितों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन घरेलू आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए अलग और ठोस नीतिगत कदमों की आवश्यकता होगी।