गुरुग्राम में स्वास्थ्य कर्मियों ने ट्रेनिंग से किया किनारा
गुरुग्राम: Gurugram में हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने टेली-ईसीजी ट्रेनिंग लेने से इंकार कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की योजना को झटका लगा है।
जानकारी के अनुसार, एसोसिएशन ने ट्रेनिंग को लेकर कुछ आपत्तियां और मांगें उठाई हैं, जिनके चलते फिलहाल उन्होंने इसमें भाग लेने से मना कर दिया।
इस मामले को लेकर विभाग और एसोसिएशन के बीच बातचीत जारी है, ताकि समाधान निकाला जा सके और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर न पड़े।
नर्सिंग आफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष विनीता बांगड़ ने कहा कि उन्हें 24 मई 2026 को पता चला कि महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा सभी सिविल सर्जन को एक पत्र के माध्यम से हरियाणा में टेली ईसीजी ट्रेनिंग के लिए नर्सिंग स्टाफ की लगाई थी। यह कार्य नर्सिंग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है, लेकिन सभी जिलों के सिविल सर्जन के द्वारा हरियाणा में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ पर इस ट्रेनिंग के लिए दबाव बनाया गया। ट्रेनिंग नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को लिखा गया। नर्सिंग आफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा ज्ञापन के माध्यम से डीजीएचएस के समक्ष इसका विरोध दर्ज करवाया गया। पूरे हरियाणा में बहुत बड़े स्तर पर स्वास्थ्य विभाग ने ईसीजी मशीनें खरीदी हैं। इन्हें ऑपरेट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग में कोई ईसीजी तकनीशियन भर्ती नहीं किए हैं। नर्सिंग कैडर पर एक ओर अतिरिक्त कार्य का भार एक पत्र के माध्यम से डाल दिया गया है।
विनीता बांगड़ ने कहा कि नर्सिंग कैडर के अपने मरीजों की देखभाल के साथ-साथ ओर भी बहुत कार्य जैसे-फार्मेसी, लैब टेक्नीशियन, ब्लड कलेक्शन (जो कि लैब टेक्नीशियन का कार्य है), कोल्ड चेन, बिना डाक्टर के डिलीवरी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, टांके लगाना, केन्यूला लगाना, मरीजों के एडमिशन व डिस्चार्ज करना, रेफर बनाना, कम्प्यूटर का कार्य, बिना डाक्टरों के डिलीवरी करवाना तथा इवनिंग एवं नाइट में जहां डाक्टर उपलब्ध नहीं है वहां नर्सिंग आफिसर ही सेवाएं दे रही है। अस्पतालों में वार्डों में मरीजों की ज्यादा संख्या व रेशो को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ बहुत कम है। जिससे मरीजों की सेवा प्रभावित होती हैं। ऐसे में अन्य पैरामेडिकल का काम थोपे जाने से नर्सिंग कैडर डिप्रेशन और भारी तनाव का शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग हरियाणा द्वारा समय पर ईसीजी तकनीशियन की कोई भर्ती नहीं करी और ना ही आऊटसोर्सिंग से कोई भर्ती की गई। यह एक तकनीकी कार्य है। अगर इसमें कुछ भी गड़बड़ी होती है तो उसका सीधा असर मरीजों की जान पर होता है। ईसीजी तकनीशियन के लिए दो साल का डिप्लोमा करना होता है। स्वास्थ्य विभाग हरियाणा में नर्सिंग कैडर के अलावा कोई भी अन्य पैरामेडिकल कर्मचारी से उनके कार्यक्षेत्र से बाहर कोई भी कार्य नहीं करवाया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि टेली-ईसीजी जैसी आधुनिक तकनीक से मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज मिल सकता है, इसलिए इसे जल्द लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।