डीसी ने फरल गांव में संभावित ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया
कैथल: Kaithal के गांव फरल में ऐतिहासिक महत्व की संभावनाओं को देखते हुए डीसी अपराजिता ने मौके का दौरा किया।
दौरे के दौरान उन्होंने क्षेत्र में प्राचीन अवशेषों और ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी जुटाई और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए।
डीसी ने कहा कि यदि गांव में ऐतिहासिक महत्व के प्रमाण मिलते हैं, तो इसे संरक्षित कर पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
दौरे के दौरान टीम ने कुषाण काल से जुड़े पुरास्थलों, विशेषकर एक प्राचीन स्तूप का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर मिले पेंटेड रेड वेयर (चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन), प्राचीन कलाकृतियों और अन्य अवशेषों का अवलोकन किया। माना जा रहा है कि ये सामग्री इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने में अहम साबित हो सकती है।
डीसी अपराजिता ने कहा कि फरल गांव ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां की विरासत को संरक्षित करना प्राथमिकता है। उन्होंने संकेत दिए कि प्रशासन और पुरातत्व विभाग मिलकर यहां और साक्ष्य जुटाने का प्रयास करेंगे, ताकि वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और विकास की दिशा में काम आगे बढ़ सके। इस दौरान डीसी ने फल्गु तीर्थ स्थित मंदिरों में भी माथा टेका और स्थानीय आस्था से जुड़े पहलुओं को समझा।
डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार ने बताया कि प्रारंभिक अध्ययन में सामने आया है कि इस क्षेत्र में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास मानव बसावट के प्रमाण मिलते हैं। फरल में मौजूद प्राचीन टीला और धार्मिक स्थल न केवल ऐतिहासिक महत्व रखते हैं, बल्कि आज भी लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कैथल का इतिहास सिंधु-सरस्वती सभ्यता से जुड़ा माना जाता है और आसपास के क्षेत्र, विशेषकर बालू गांव, भी पुरातात्विक दृष्टि से अहम रहे हैं। करीब पांच हजार वर्ष पुरानी सांस्कृतिक निरंतरता इस इलाके की खास पहचान है।
इस पहल से क्षेत्र के इतिहास को नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।