Buy High Quality BacklinksNettoyage professionnel en SavoieInstant URL Indexingcasino link building servicesbuy cheap backlinkWebshellfast google indexingBuy hidden backlinksPremium Backlinks for SEObuy backlinkshacklink satin alBuy Hidden Backlink
Ludhiana: सत्संग में आत्मिक चेतना पर जोर: स्वाध्याय, जप और सेवा से जीवन में शांति संभव : संत रमणीक बेदी - Uturn Time
Uturn Time
Breaking
Zirakpur: कृष्णा एंक्लेव में पूर्व पार्षद ने निजी खर्च पर शुरू कराया सड़क निर्माण Panipat: वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती बड़े उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाई Chandigarh: पीयू के सरदार वल्लभ भाई पटेल बॉयज हॉस्टल नं. 4 ने भोजन गुणवत्ता निरीक्षण में प्राप्त किया प्रथम स्थान Panchkula: नगर निगम चुनाव में सुरक्षा के साथ सेवा भाव भी निभाती दिखी पंचकूला पुलिस, बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की बनी सहारा Panchkula: भाजपा नेता योगेश्वर शर्मा ने पत्नी संग किया मतदान, वोटिंग की अपील Amritsar: टीम की जीत की कामना लेकर दरबार साहिब पहुंचीं प्रीति जिंटा Chandigarh: सेक्टर-39 थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, वाहन चोरी के आरोपी को दबोचा; चोरी की एक्टिवा बरामद Jagraon: 'कर भला हो भला' संस्थान द्वारा 71वां राशन वितरण समारोह संपन्न Ludhiana: सत्संग में आत्मिक चेतना पर जोर: स्वाध्याय, जप और सेवा से जीवन में शांति संभव : संत रमणीक बेदी Jagraon: ​जीएचजी अकादमी में गूँजा सुरक्षा का मंत्र Jagraon: मदर्स डे पर छलका सफाई कर्मियों का दर्द Jagraon: जगरांव में लोक अदालत से बढ़ा न्याय के प्रति विश्वास
Logo
Uturn Time
"लुधियाना सत्संग में आध्यात्मिक संदेश, आत्मिक चेतना पर दिया जोर"
लुधियाना: श्री राम शरणम् , श्री राम पार्क के साप्ताहिक सत्संग में संत रमणीक बेदी जी ने कहा कि पूज्य श्री स्वामी सत्यानन्द जी का कथन है कि सत्संग के प्रभाव से मलिन आत्मा-पुरुष भी उस परम-पद को जा पहुंचता है। भगवान के नाम को लेना अपनी आत्मा को उठाना है। इससे व्यवहार भी अच्छा होता है, परलोक भी और परमार्थ की तो पदवी सिद्ध हो जाती है। इसलिये हर स्त्री-पुरुष को सिमरन, जप करना चाहिये-स्वाध्याय भी करना चाहिये। बड़ाई कोई अच्छे आभूषण में ही नहीं, अपितु ज्योति को निर्मल बनाना चाहिये। मृत्यु होने पर लोग रोते हैं और कहते हैं, वह छोड़ गया। मरता कोई नहीं है , आत्मा मरता नहीं है। जैसे कोई घर से खेत में गया, घर में तो है नहीं। रोना अपने सुख और स्वार्थ का है। पर वह लौट कर तो आता नहीं है। बल्ब फ्यूज़ हो जाये, तो क्या बिजली ही बंद हो गई? इस आत्म-शक्ति को जाग्रत करना। स्वाध्याय, सत्संग, जप, पाठ, आराधन करना। अनर्थ और व्यर्थ कर्म छोड़ना। बहनों और भाइयों! इन बातों को स्मरण रखना, इनको पालन करना। प्रत्येक व्यक्ति सुखार्थी है। सुख तीन प्रकार के होते हैं— सात्त्विक, राजसिक और तामसिक। आरम्भ में विषवत्, किन्तु परिणाम में मधुर सुख ही सात्त्विक है। वह सुख बुद्धि के प्रकाश से प्राप्त होता है तथा आत्मबुद्धि की प्रसन्नता से उत्पन्न होता है, अतः आत्म बुद्धि 'प्रसाद' - सुख होता है। विषय और इन्द्रियों पर आधारित सुख पहले अमृत सदृश्य होता है, परन्तु परिणाम में मृत्यु तुल्य होता है। यह सुख राजस है। निद्रा, प्रमाद और आलस पर आधारित सुख तामसी होता है। राजस और तामसी सुखों को त्यागना चाहिये। ★ शंका-रहित भक्ति से पराभक्ति की प्राप्ति होती है। इसी को अनन्य व निर्भरा-भक्ति कहते हैं। मोक्ष का सरल और निश्चित मार्ग राम-नाम पर अटल विश्वास है। ★ जन-सेवा भी भक्ति का प्रकार है। तुम्हारा प्रत्येक कार्य भगवान की पूजा है। सतत परहित और सेवा में लगे रहो, यही सच्ची भक्ति है। आध्यात्मिक जगत में प्रीति या प्रेम को ही भक्ति कहते हैं। प्रीति के अभाव में ज्ञान या कर्म संभव नहीं होते। बिना प्रीति के कर्म, कर्म के रूप में नहीं हो सकता। झरने उसी पहाड़ में से निकलते हैं, जिसमें जल होता है। फिर भला बिना प्रीति के ज्ञान और कर्म कैसे सम्भव होंगे? इष्ट के प्रति प्रीति को भक्ति कहते हैं। देखा जाये तो ज्ञान, कर्म और भक्ति तीनों एक ही रूप हैं। बिना प्रीति के न ज्ञान सम्भव है न कर्म और न भक्ति ही हो सकती है। भक्ति को ज्ञान और कर्म का समन्वय कह सकते हैं। जब प्रीति गूढ़ हो जाती है तो वही भक्ति कहलाती है। वैसे बड़ा छोटा कहना केवल वाणी-विलास है। कौन को बड़ा कहा जाये और किसे अल्प समझा जावे? सभा में शशि भल्ला , आशिमा बेदी , संयम बेदी भल्ला , बहार प्रकाश , राजन कपूर , अंजू कपूर , सुदर्शन जैन , सुमन जैन , वरिंदर जैन , आशु जैन , मधु बजाज , राज गुप्ता , रामेश्वर गुप्ता , मंजू गुप्ता , शशि गुप्ता , सना जिंदल , श्रुति थापर , पलवी धवन , स्वीट धवन , सोनिया तिवारी , गुलाब राये , अदिति मित्तल , प्रेम मित्तल , राधिका गुप्ता , शुचिता दुग्गल सहित अनेक साधक सम्मिलित हुए । राम, सब पर कृपा करें। सब को आशीर्वाद।