पंजाब की राजनीति में जारी हलचल के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा के विशेष सत्र में शक्ति प्रदर्शन करते हुए विश्वासमत हासिल कर लिया। प्रस्ताव सदन में पारित हो गया, लेकिन विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी और वॉकआउट ने पूरे घटनाक्रम को सियासी रंग दे दिया।
विश्वासमत प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार पूरी तरह स्थिर है और विधायकों के टूटने की जो चर्चाएं चल रही हैं, वे महज अफवाह हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर भ्रम फैलाकर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
सत्र के दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया जब मुख्यमंत्री ने विपक्षी विधायकों के व्यवहार पर टिप्पणी की। इस पर कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जबकि भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के विधायक पहले से ही सत्र में शामिल नहीं थे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस आपसी मिलीभगत से उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी मजबूत है और किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगी।
सरकार के समर्थन में बोलते हुए विधायक अनमोल गगन मान ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई और कहा कि वे अंत तक पार्टी के साथ खड़े रहेंगे। वहीं मंत्री संजीव अरोड़ा ने सरकार की चार साल की उपलब्धियां गिनाते हुए बिजली दरों में राहत, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और लंबित कार्यों के निपटारे को प्रमुख उपलब्धियां बताया।
हालांकि विश्वासमत पारित होने से सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है, लेकिन सदन में हुए हंगामे और विपक्ष के बहिष्कार ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।