रेप की शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक भटकने के बाद कथित तौर पर पुलिस की अनदेखी से परेशान एक महिला ने मंगलवार को जीरकपुर के बाल्टन चौकी पुलिस चौकी के बाहर खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसी महिला को पहले सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसकी हालत नाजुक होने पर उसे PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि महिला करीब 70 फीसदी तक झुलस गई है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
पीड़िता के परिवार के अनुसार, वह पिछले कई दिनों से पुलिस चौकी के चक्कर काट रही थी, लेकिन उसकी रेप की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जा रही थी। मंगलवार को भी वह अपने भाई के साथ पुलिस चौकी पहुंची, जहां आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांटकर बाहर निकाल दिया।
परिजनों का आरोप है कि इसके कुछ ही देर बाद महिला ने निराशा में पुलिस चौकी के बाहर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
महिला के भाई ने बताया कि उसकी बहन के साथ एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया था, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में टालमटोल करती रही। मंगलवार को भी पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि आरोपी को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आया। जब जीरकपुर के बाल्टन चौकी ने FIR दर्ज करने पर जोर दिया तो उन्हें बाहर निकाल दिया गया।
उधर, पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत पर अब FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच एसपी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरमंदीप सिंह हंस ने कहा कि आत्मदाह के प्रयास की घटना की भी गहन जांच की जाएगी और सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त कोमल मित्तल ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने SSP को निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि यदि पुलिस कर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीसी ने सिविल सर्जन को भी निर्देश दिए हैं कि वे PGI जाकर पीड़िता की स्थिति का आकलन करें और उसके इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहने दें। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता को हर संभव सहायता बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाए।
फिलहाल पुलिस चौकी के CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पीड़िता और उसके परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।