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वैशाख पूर्णिमा बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर पीपल के वृक्ष के बारे में बताया जाता है कि इस दिन पीपल की पूजा करने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलनी सम्भव है। इस बार यह पर्व 1 मई शुक्रवार को वैशाख पूर्णिमा पर दुर्लभ योग के साथ जो कई वर्षों बाद आया है, मनाया जा रहा है और पूर्णिमा का व्रत भी 1 मई शुक्रवार को ही रखा जाएगा। इस दिन और खास तौर पर प्रतिदिन पीपल का पूजन करने वाले व्यक्ति की जन्मकुंडली के कई दोष समाप्त हो जाते हैं और वह मानसिक तनाव व रोगों से मुक्त हो जाता है और दिव्य ज्ञान चक्षु भी खुल जाते हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में पीपल वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। पीपल को जल अर्पित कर सरसों के तेल का दीपक जला कर कम से कम सात परिक्रमा करना भी विशेष फलदायी माना गया है। पीपल वृक्ष समस्त वृक्षों में सबसे पवित्र माना गया है। पीपल वृक्ष के निचले भाग में ब्रह्मा जी का वास है, मध्य में विष्णु जी और सबसे ऊपर भगवान शिव का वास है और सभी पत्तों में सभी देवताओं का वास माना जाता है। कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर श्रीमद्भगवद् गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुख से कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूं। बिहार राज्य में गया धाम स्थान पर महात्मा बुद्ध को भी पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने पर ही ज्ञान प्राप्त हुआ था। वो अति प्राचीन पीपल का वृक्ष आज भी गया जी स्थान पर जो बिहार में मौजूद है जो विश्व में बौद्ध गया के नाम से प्रसिद्ध है। जिन व्यक्तियों का आत्मबल, मनोबल और जन्म कुण्डली में चंद्रमा कमजोर है, उनको इस दिन का लाभ उठाना चाहिए और गाय के दूध से भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए तथा जिन व्यक्तियों की जन्म कुण्डली में बृहस्पति की स्थिति ठीक नहीं है या जिन व्यक्तियों के कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहे हैं और आर्थिक संकट और कर्ज में डूबे हुए हैं, उन व्यक्तियों को शुद्ध गन्ने के रस से भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए। अपने परिवार के सदस्यों के वजन के बराबर गौशालाओं में गऊओं को हरि घास खिलाने का भी महत्त्व माना जाता है। पीपल का वृक्ष लगाने व आरोपण पालन करने वाले व्यक्तियों की जन्मकुंडली के पितृ दोष भी समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और जातक की सुख- सौभाग्य, संतान, पुत्र रत्न आदि की प्राप्ति होती है। पीपल ही एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो चौबीसों घंटे दिन - रात ऑक्सीजन प्रदान करता है। अपने पूर्वजों का ध्यान रखते हुए पीपल सहित सभी वृक्षों को जल अर्पित करना और पशु-पक्षियों को भी जल बैसाख मास में पिलाना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है, जिससे जातक का आत्मबल और मनोबल शीघ्र ही मजबूत हो जाता है। जातक के अधूरे कार्य अति शीघ्र पूरे होने लगते हैं और मनुष्य मानसिक तनाव से मुक्त हो जाता है और आरोग्यता प्राप्त होती है। वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक संगठन सचिव षडदर्शन साधुसमाज श्री गोविंदानंद आश्रम पिहोवा।