जीरकपुर के बिशनपुरा स्थित डंपिंग ग्राउंड में लगी आग तीन दिन बाद भी पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी है। ऊपर से आग भले शांत नजर आ रही हो, लेकिन कूड़े के ऊंचे ढेरों के भीतर अब भी सुलग रही है। इससे उठ रहा काला और जहरीला धुआं आसपास की रिहायशी सोसाइटियों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
सोमवार सुबह लगी इस आग को बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीमें लगातार मौके पर डटी हुई हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पानी की बौछार कर रही हैं, वहीं जेसीबी मशीनों की मदद से कचरे के ढेरों को हटाकर अंदर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग पूरी तरह बुझने का नाम नहीं ले रही।
धुएं ने बिगाड़ी सांसें, घरों में कैद लोग
डंपिंग ग्राउंड से उठ रहे घने धुएं ने आसपास के इलाकों का माहौल जहरीला कर दिया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार सुबह और शाम के समय धुएं की तीव्रता बढ़ जाती है, जिससे घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है। लोग खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने को मजबूर हैं, फिर भी बदबू और धुआं अंदर तक पहुंच रहा है।
लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं की शिकायत की है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा मरीजों के लिए हालात और भी गंभीर बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि डंपिंग ग्राउंड लंबे समय से समस्या बना हुआ है, लेकिन हर बार केवल अस्थायी उपाय किए जाते हैं। लोगों ने कचरा प्रबंधन के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की मांग उठाई है ताकि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न बनें।
डंपिंग ग्राउंड से उठ रहे धुएं के कारण शहर की हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स “खराब” श्रेणी में पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार पीएम 2.5 और पीएम10 कणों का स्तर बढ़ने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लोगों से सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने और मास्क का उपयोग करने की अपील की गई है।
बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड में लगी आग अब सवालों के घेरे में आ गई है। जहां एक ओर दमकल विभाग आग बुझाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आग अपने आप लगी या इसके पीछे कोई साजिश है।
जानकारी के अनुसार, डंपिंग ग्राउंड की सफाई के लिए हाल ही में ठेका दिया गया था। ऐसे में कुछ लोग यह आशंका जता रहे हैं कि कचरे को हटाने से पहले आग लगने से काम आसान हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन फिलहाल इसे सामान्य आग की घटना मानते हुए नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन संदेह की स्थिति बनी हुई है।