Uturn Time
Breaking
Chandigarh: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश, नंबर सीरीज बदलाव पर शुल्क नहीं Chandigarh: सीएम सैनी का सुझाव, टैंक बनाकर बढ़ाएं माइक्रो इरिगेशन Chamoli: 225 दिन बाद खुले हेमकुंड साहिब के कपाट, 5 क्विंटल फूलों से सजा धाम, 3000 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन Gurdaspur: शादी के 3 महीने बाद फौजी ने सुसाइड किया, पत्नी प्रेमी संग भागने पर उठाया कदम, पुलिस ने नहीं की थी सुनवाई Chandigarh: लेह में भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश, तीन आर्मी ऑफिसर बचे, मेजर जनरल ने सेल्फी ली New Delhi: सोशल मीडिया पर दिल्ली के तापमान को लेकर हड़कंप, दिल्ली का पारा 42 डिग्री या 65? Chandigarh: रंगला पंजाब पहल से पर्यटन क्षेत्र को मिल रही नई उड़ान : डॉ. संजीव कुमार तिवारी Hoshiarpur: केवल सत्संग ही आत्मिक शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का माध्यम Hoshiarpur: ओहरी ने वृद्ध आश्रम और कुष्ट आश्रम में सेवा करके सादे और प्रेरणास्रोत ढंग से मनाया जन्मदिन जमीनीं विवाद में भतीजे ने किया चाचा का मर्डर, डंडे से किया वार 225 दिन बाद खुले हेमकुंड साहिब के कपाट, 5 क्विंटल फूलों से सजा धाम, 3000 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन Phagwara: राज्यसभा सीटों और मंत्रियों के पद बेचने संबंधी क्रिकेटर हरभजन सिंह के आरोपों का जनता को जवाब दे भगवंत मान
Logo
Uturn Time
भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े जल विवाद मामले में पंजाब सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने हरियाणा को पानी दिए जाने के फैसले के खिलाफ दायर पंजाब की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में तय वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पंजाब सरकार ने बीबीएमबी द्वारा हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने के निर्णय को चुनौती दी थी। राज्य का कहना था कि यह फैसला उसकी सहमति के बिना लिया गया और बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया। पंजाब ने यह भी दलील दी कि तकनीकी समिति की बैठक में “द्विपक्षीय सहमति” की शर्त को हटाकर एकतरफा निर्णय लागू किया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही सुनवाई हो चुकी है और संबंधित पक्ष के पास वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं। अदालत ने दोहराया कि जल वितरण जैसे तकनीकी और नीतिगत मामलों में सीधे न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि पंजाब सरकार को बीबीएमबी के फैसले पर आपत्ति है, तो वह नियमों के तहत केंद्र सरकार के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि जिस अवधि के लिए पानी छोड़ा गया था, वह अब समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा, अदालत ने बीबीएमबी के कामकाज में कथित हस्तक्षेप को लेकर दायर अवमानना याचिका का भी निपटारा कर दिया और कहा कि अब इस पर कोई औचित्य नहीं बनता। इस फैसले को हरियाणा के लिए राहत और पंजाब के लिए झटका माना जा रहा है, जबकि विवाद के समाधान के लिए अब केंद्र सरकार का दरवाजा खुला है।