गुस्ताख़ी माफ़ 8.4.2026
शुक्र कीजिए शुद्ध हम, देते नहीं जनाब।
हो जायेगा आपका, वर्ना पेट ख़राब।
वर्ना पेट ख़राब, ज़रा-सा लेते मेवा।
मिलावटी दे मिल्क, कर रहे जन की सेवा।
कह साहिल कविराय, ग़लत मत आप लीजिए।
कितना रखते ध्यान, हमारा शुक्र कीजिए।
प्रस्तुति --- डॉ. राजेन्द्र साहिल