चंडीगढ़/यूटर्न/7 अप्रैल। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के ज़रिए अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में हरियाणा के गैंगस्टर भानु राणा की कथित हत्या की ज़िम्मेदारी ली है, हालांकि अधिकारियों की तरफ़ से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गैंग से जुड़े अकाउंट्स से की गई इस पोस्ट में हमलावरों ने दावा किया कि एक साल पहले हमने ऐलान किया था कि हम भानु राणा को खत्म कर देंगे... जो कोई भी देश के खिलाफ काम करेगा, उसे मार दिया जाएगा, चाहे वह कहीं भी छिपा हो। इस संदेश में राणा को "गद्दार" बताया गया और आरोप लगाया गया कि वह विरोधी गैंग्स को जानकारी दे रहा था। इसमें यह चेतावनी भी दी गई कि जो लोग देश के दुश्मनों का साथ दे रहे हैं, वे "तैयार रहें, मौत कभी भी आ सकती है। इस पोस्ट से गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं, लेकिन इसकी सच्चाई और राणा की हत्या के दावे की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। करनाल का रहने वाला एक युवक, जो फिलहाल कैलिफ़ोर्निया में रह रहा है, उसने कथित तौर पर कहा है कि ऐसी किसी घटना की स्थानीय स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, जिससे गैंग के दावों पर संदेह पैदा होता है।
राणा का लंबा आपाराधिक इतिहास
करनाल ज़िले का मूल निवासी राणा का एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि उसका नाम पहली बार 2015 में मारपीट के मामलों में सामने आया था। 2018 में, उस पर अवैध हथियार रखने और हिंसक झड़पों में शामिल होने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। पिछले कुछ सालों में, उस पर व्यापारियों, जौहरियों और इमिग्रेशन व्यवसायों से रंगदारी मांगने के मामलों में शामिल होने का आरोप लगा, जबकि 2020 और 2022 के बीच गोलीबारी और शूटआउट की कई घटनाओं ने संगठित अपराध नेटवर्क में उसकी मौजूदगी को और पुख्ता कर दिया।
राणा पहले बिश्नोई गैंग का हिस्सा था
जांचकर्ताओं का कहना है कि राणा पहले बिश्नोई गैंग से जुड़ा था, लेकिन बाद में वह उससे अलग हो गया और कथित तौर पर विरोधी गैंग्स से हाथ मिला लिया, जिसकी वजह से वह उनका निशाना बन गया। माना जाता है कि 2023 में, वह जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके अमेरिका भाग गया था। हरियाणा STF ने जून 2025 में उसके साथियों को हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार भी किया था, जिससे हथियारों की सप्लाई के बड़े नेटवर्क से उनके तार जुड़े होने का खुलासा हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि राणा की कथित हत्या की किसी भी पुष्टि के लिए अमेरिकी अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी और आगे की जांच पर निर्भर रहना होगा।
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