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चंडीगढ़/यूटर्न/26 मार्च। ईरानी सरकारी टेलीविज़न के अनुसार, ईरान ने दावा किया है कि उसने बुधवार, यानी आज, USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत पर एक क्रूज़ मिसाइल दागी है। हालाँकि, अमेरिकी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई पुष्टि या प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अन्य अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों पर यह चर्चा ज़ोरों पर है कि ईरान ने वास्तव में अमेरिका को ज़ोरदार चोट पहुँचाई है। ईरानी सेना के जनसंपर्क विभाग ने बताया कि अमेरिकी विमानवाहक पोत की दिशा में तटीय क्रूज़ मिसाइलें दागी गईं। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ईरानी नौसेना ने संयुक्त राज्य अमेरिका को सीधी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि USS अब्राहम लिंकन हमारी कड़ी निगरानी में है और यदि वह ईरानी क्षेत्र के क़रीब आता है, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। सरकारी प्रसारक 'प्रेस टीवी' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी ने चेतावनी दी थी कि यदि विमानवाहक पोत ईरान की मिसाइल प्रणालियों की सीमा में प्रवेश करता है, तो सेना की नौसेना द्वारा उस पर हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पोत की लगातार निगरानी की जा रही है। इस चेतावनी के साथ ही, वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारियों की ओर से व्यापक टिप्पणियाँ भी आईं, जिनमें अमेरिकी प्रभाव को ख़ारिज किया गया। प्रेस टीवी ने बताया कि 'ख़ातम अल-अंबिया' केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़िकारी ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पहले दावा की गई "रणनीतिक शक्ति" अब "रणनीतिक हार" में बदल गई है। ये टिप्पणियाँ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किए गए उस "तनाव कम करने" (de-escalation) के प्रयास के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमले करने के लिए दी गई 48 घंटे की समय-सीमा से क़दम पीछे खींच लिए थे। बताया जाता है कि यह बदलाव तब आया, जब ईरान ने चेतावनी दी थी कि ऐसे किसी भी हमले का जवाब, पूरे क्षेत्र में ऊर्जा और बिजली के बुनियादी ढाँचे पर जवाबी हमले करके दिया जाएगा। अमेरिकी रुख़ में आए इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए ज़ोलफ़िकारी ने कहा, "यदि दुनिया की स्व-घोषित महाशक्ति इस दुविधा से बच निकल सकती, तो वह अब तक ऐसा कर चुकी होती। अपनी हार को 'समझौता' का नाम मत दो।" ये टिप्पणियाँ ट्रम्प के 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफ़ॉर्म पर किए गए उन दावों का खंडन करती हुई भी प्रतीत होती हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि पिछले दो दिनों के दौरान दोनों देशों के बीच पश्चिम एशिया में शत्रुता को समाप्त करने की दिशा में "बहुत अच्छी और रचनात्मक बातचीत" हुई है। हालाँकि, प्रेस टीवी ने तेहरान स्थित एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि दोनों पक्षों के बीच कोई भी आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। ज़ोलफ़िकारी ने भी इसी रुख़ का समर्थन करते हुए कहा कि वाशिंगटन के आश्वासनों पर निर्भर रहने का दौर अब समाप्त हो चुका है। “आपके वादों का दौर अब खत्म हो चुका है। आज दुनिया में सिर्फ़ दो ही पक्ष हैं: सच और झूठ। और आज़ादी चाहने वाला सच का हर खोजी आपकी मीडिया की लहरों से गुमराह नहीं होगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के भीतर मौजूद आपसी फूट का भी मज़ाक उड़ाया, और यह सवाल उठाया कि क्या “आपकी आपसी लड़ाई इस हद तक पहुँच गई है कि आप खुद से ही बातचीत करने लगे हैं।” ज़ोलफ़ाक़ारी ने आगे यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी निवेश और ऊर्जा की कीमतें अब पहले के स्तर पर कभी वापस नहीं लौटेंगी, और ज़ोर देकर कहा कि अब इस क्षेत्र की स्थिरता का निर्धारण ईरान की सैन्य क्षमताओं से ही होगा। “इस क्षेत्र में स्थिरता हमारी सेनाओं के मज़बूत हाथों से ही सुनिश्चित होती है,” उन्होंने कहा, और इस स्थिति को “ताकत के दम पर स्थिरता” बताया।