चंडीगढ़ 3 जनवरी। 1 जनवरी की आधी रात को सोलन के नालागढ़ में बम धमाका हुआ। गुरुवार को सोलन जिले के नालागढ़ में एक पुलिस स्टेशन के पास हुए इस धमाके की आवाज़ सुनकर नालागढ़ के कई लोग जाग गए। हालांकि, किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह हिमाचल में हुआ पहला बम धमाका है। हिमाचल में हुई एकमात्र दूसरी आतंकी घटना 1998 में हुई थी, जब डोडा से सटे चंबा में पाकिस्तान स्थित इस्लामिक आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिदीन ने 35 हिंदुओं को मार डाला था। एक गली में हुए इस धमाके का असर इतना तेज़ था कि पास की इमारतों की खिड़कियां, जिसमें 40 मीटर दूर आर्मी कैंटीन की खिड़कियां भी शामिल हैं, टूट गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाके की तेज़ आवाज़ 400-500 मीटर दूर तक सुनी गई। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को कहा कि एनआईए नालागढ़ बम धमाके की जांच कर रही है और घटना को अंजाम देने वालों के बारे में एजेंसी की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता चलेगा।
फोरेंसिक विशेषज्ञों ने लिए सैंपल
सोलन जिले में सीएम सुक्खु ने कहा कि राज्य के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से सैंपल लिए हैं और इलाके के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। कंडाघाट में दिव्यांगजनों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शिलान्यास करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि चूंकि मामला जांच के अधीन है, इसलिए घटना को अंजाम देने वालों के बारे में एनआईए की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता चल पाएगा। बब्बर खालसा इंटरनेशनल और पंजाब सॉवरेनिटी अलायंस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में, जिसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है, धमाके की जिम्मेदारी ली है।
धमाके में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस किया इस्तेमाल
पोस्ट में दावा किया गया है कि धमाके के लिए एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था, और यह हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा हिमाचल प्रदेश में बने सिंथेटिक ड्रग्स की पंजाब में तस्करी के खिलाफ कार्रवाई न करने" के बदले में किया गया था। इसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो पुलिस प्रशासन की गाड़ियों और हेडक्वार्टर में आईईडी लगाए जाएंगे।
मास्टरमाइंड अलग अलग देशों से कर रहे काम
पड़ोसी पंजाब में भी पुलिस स्टेशनों को निशाना बनाकर ऐसे ही हमले हो रहे हैं, जिसमें राज्य के डीजीपी ने पाकिस्तान पर शांति भंग करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि ऐसे हमलों के मास्टरमाइंड उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया और खाड़ी देशों से काम कर रहे हैं।
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