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चंडीगढ़/ यूटर्न/21 मार्च।श्रीमान जी हम चंडीगढ़ के कर्मचारियों की और से आप का बहुत बहुत धन्यवाद करते है कि आपके दखल के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने साल 2025-2026 के लिए डीसी रेट्स को रिवाइज कर चंडीगढ़ में कार्यरत अठारह हजार से भी अधिक आउटसोर्सड वर्करों के वेतन में बढ़ोतरी करदी है। चंडीगढ़ प्रशाशन तथा नगर निगम में काम कर रहे हजारों आउट सोर्सड वर्करो तथा रेगुलर कर्मचारियों की कुछ ऐसी मांगे है जो श्रम कानूनों तथा केंद्रीय सरकार द्वारा बनाए गए एक्ट्स अनुसार बिल्कुल जायज है, आपकी दखल के बाद इन मांगो का भी जल्द हल हो सकता हैं। निम्न लिखित मांगे जिनको 29 नवंबर को हुई यू.टी. कर्मचारियों की कन्वेंशन में पारित किया गया है। 1. केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड की कुछ धाराएं मजदूरों के अधिकारों को कम करने वाली है इस लिए आप से अनुरोध है कि लेबर कोड से मजदूर विरोधी धाराएं खत्म की जाए ता जो भारतीय संवीधान का वेलफेयर स्टेट का दर्ज कायम रहे। 2. डीसी रेट्स में एक बड़ी त्रुटी है, जिसे ठीक करने की जरूरत है। मौजूदा डीसी रेट्स में सभी वर्करों को समान वेतन मिलता हैं, चाहे कोई वर्कर आज नौकरी पर लगा हो उसको भी उतना ही वेतन मिलता हैं जितना वेतन 10 जा 20 साल से नौकरी कर रहे वर्कर को मिलता। यह बहुत बड़ी त्रुटि है जिसे दूर करने की जरूरत है। सरकार ने श्रम कानून में बहुत स्पष्ट अंकित किया है कि हर वो वर्कर जिस को नौकरी पर लगे हुए 5 साल हो गए है उसको ‘अगली उच्च श्रेणी’ में प्रमोट किया जाएगा। इस को भी लागू नहीं किया जा रहा। 3. दूसरा पर्याप्त बजट होने के बावजूद वर्करों को कानून अनुसार समय≤ पर वेतन नहीं मिलता। दो-दो तीन तीन महीने वेतन ना मिलने से वर्करों को घर चलाना मुश्किल हो जाता हैं। इस संबंध में संबंधित अधिकारी की जिम्मेवारी फिक्स होनी चाहिए। वर्करों को लाभ देने वाले सभी लेबर कानून लागू होने चाहिए। 4. कान्ट्रैक्ट लेबर रेगुलेशन एंड एबल्शन एक्ट 1970 तथा रूल्स 1971 के अनुसार सभी आउट सोर्सड वर्करों को सिमिलर पे फार सिमिलर वर्कर के आधार पर वेतन दिया जाए। हम आपके संज्ञान में लाना चाहते है कि इस विषय पर प्रशाशन से कई दौर की बैठकें हो चुकी है तथा प्रशासन भी इस मुद्दे पर सहमत है। हम आप से अनुरोध करते है कि इस विषय पर केद्रीय सरकार से जल्द मंजूरी लेकर सिमिलर पे फार सिमिलर वर्क के कानून को लागू किया जाए। 5. ऐसे ही पेमेंट आफ बोनस एक्ट अनुसार आउट सोर्सेड वर्करों को बोनस दिया जाए तथा ई.एस.आई. रीजनल बोर्ड के फैसले मुताबिक लीजीबील्टी लिमिट 21000/- से बढ़ा कर 50000/- की जाए। हम आपके संज्ञान में लाना चाहते है कि पी.जी.आई. अथारिटी ने इस एक्ट को लागू कर दिया है। 6. चण्डीगढ़ एडमिनीस्ट्रेशन ने डेली वेज वर्करों को रेगुलर करने की पालिसी बनाई है जिस में कई बार जरूरत अनुसार बदलाव भी किए गए है।13.03.2015 की पालिसी में एक बार बदलाव किया गया था। इस के बावजूद नगर निगम में काम करने वाले कुछ डेली वेज वर्करों को अभी भी इस पालिसी का लाभ नहीं मिल रहा। आप से अनुरोध है कि इस पालिसी में पेंडिंग एमेंडमेंट को जल्द जल्द किया जाए ताकि वंचित वर्करों को भी इस पालिसी का लाभ मिल सके। डेली वेज वर्करों को भी साल में 12 छुट्टी मिलनी चाहिए। 7. नगर निगम तथा अन्य विभागों में सैकड़ों खाली पड़ी पोस्ट रिक्रू टमेंट रूल्स में अमेंडमेंट ना होने के कारण नहीं भरी जा रही। प्रमोशन की पोस्ट भी समय पर नहीं भरी जाती, वर्करों को प्रमोशन देते वक्त कई तरह से वर्करों का शोषण किया जाता है। इस संबंध में आप से अनुरोध है कि प्रमोशन में देरी होने पर जिम्मेवारी जरूर फिक्स होनी चाहिए। 8. नगर निगम से सैकड़े वर्करों को नौकरी से निकाल दिया गया है, जो वर्कर सेक्शन पोस्ट पर रखे गए थे उनको भी गैर कानूनी तरीके से निकाल दिया गया है। आप से अनुरोध है कि इस बात की जांच करवाई जाए कि अगर इन वर्करों के बिना वाटर सप्लाई तथा फायर सर्विसेज का काम चल सकता था तो इतनी बड़ी संख्या में वर्करों की भर्ती क्यों तथा किस की मंजूरी से की गई जिस से नगर निगम को करोड़ों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा तथा सैकड़ों वर्करों को जिन्होंने अपने जीवन के अहम साल लोगो की सेवा में लगाए हैं उन्हें एक झटके से नौकरी से निकल दिया। इन वर्करों की तथा इनके परवारों को चलाने की जिम्मेवारी कौन उठाएगा। इस विषय में आपके तत्काल दखल की जरूरत है।े यह मसला 450 परिवारों का है जिन के घर के बुझ चुके चूल्हे आप की दखल के बाद फिर जल सकते है। 9. इंजीनियरिंग विभाग के पब्लिक हेल्थ सर्किल के अंतर्गत काम कर रहे आउट सोर्सड वर्करों बुरे तरीके से शोषण किया जा रहा है। ठेका बदलने पर ठेकेदार पैसे मांगता हैं, जब वर्कर इस बारे अधिकारियों को शिकायत करता है तो उस से सबूत मांगा जाता हैं तथा वर्कर को तंग करना एवम् नौकरी से निकालने की धमकी मिलने लगती हैं। इस संबंध में जारी प्रशासन के निर्देशों को भी नहीं माना जा रहा। 10. रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन तथा मेडिकल रिबर्समेंट समय पर मिले यह निश्चित किया जाए। मेडीकल रेंबर्समेंट के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों को कई कई महीने दफ्तरों के चक्क्र काटने पड़ते है। 11 . प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज एक्ट अनुसार सिक्योरिटी गार्ड 65 साल की आयु तक नौकरी कर सकता है किंतु स्पोर्ट्स विभाग तथा नगर निगम में सिक्योरिटी गार्ड को 60 साल की आयु में सेवानिवृत कर दिया जाता है। इस में भी कानून लागू करने की जरूरत है। 12. चण्डीगढ़ एडमिनीस्ट्रेशन के कई ऐसे स्टैंडिंग आर्डर तथा कानून है जो अगर अधिकारी पूरी तरह ईमानदारी से लागू करदे तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान जल्द ही हो सकता। 13. यु.टी. कर्मचारियों को कैशलेस मैडीकल सकीम लागू की जाऐ। 14. मृतक के आश्रित ;वारिसद्ध को नौकरी दी जाऐ। 15. एम.यू. के अंतर्गत काम कर रहे टायलेट सफाई सेवकों को नगर निगम हाउस के फैसले अनुसार डीसी रेट्स अनुसार वेतन दिया जाए। 16. वर्करों को मिलने वाली जरूरी सुविधाएं जैसे टूल, टूलकिट, तेल साबुन आदि भी नहीं दी जा रही। यू टी कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने करने के लिए 29 सितंबर को यूटी कर्मचारियों की कन्वेंशन आयोजित की गई थी,जिस में यह फैसला लिया गया है कि अगर बातचीत के माध्यम से मसलों का हल नही होता तो 2 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ सचिवालय का घेराव किया जाएगा। इस लिए अनुरोध किया जाता है कि कोआर्डिनेशन कमेटी के प्रतिनिधियों को मिलने का समय दिया जाए ताकि कर्मचारी अपनी समस्याओं पर अपना पक्ष रख सके।