चंडीगढ़/यूटर्न/ 12मार्च। यूटी प्रशासन के विभिन्न विभागों में लंबे समय से एक ही सीट पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले न होने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि कई विभागों में अधिकारी और कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जबकि नियमों के अनुसार संवेदनशील पदों पर नियमित तबादले होने चाहिए।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन ने सभी विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने यहां तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति अवधि की पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जानकारी देने में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
कई विभागों में लंबे समय से जमे कर्मचारी
बताया जा रहा है कि यूटी प्रशासन के अधीन कई विभागों में अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। इनमें म्युनिसिपल कारपोरेशन चंडीगढ़ , शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं।
पहले भी यूटी विजिलेंस की ओर से यह निर्देश दिया गया था कि गजेटेड अधिकारियों और संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मचारियों का हर तीन वर्ष में तबादला किया जाए, लेकिन कई मामलों में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
शिक्षा विभाग में भी बड़े फेरबदल की तैयारी
सूत्रों के अनुसार चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग में भी लंबे समय से एक ही स्कूल या कॉलेज में कार्यरत शिक्षकों, प्रिंसिपलों और नॉन-टीचिंग स्टाफ के तबादले की तैयारी की जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस संबंध में यूटी सचिवालय ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसी सप्ताह शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक अहम बैठक भी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि संसद में मामला उठने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर तबादले किए जा सकते