चंडीगढ़ 28 Dec । करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपियों को संरक्षण देने के मामले में फंसे इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने के लिए प्रशासन से प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन की मांग की है। मंजूरी मिलते ही इंस्पेक्टर के खिलाफ जिला अदालत में विधिवत ट्रायल शुरू किया जाएगा।पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक निजी कंपनी से करीब छह करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है। इस केस में पहले ही राकी और गौरव नामक दो युवकों को 24 मार्च को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके कब्जे से अवैध हथियार भी बरामद हुए थे।
पूछताछ में खुली साजिश की परतें
पुलिस पूछताछ के दौरान सामने आया कि दोनों आरोपी ठगी के बाद चंडीगढ़ पहुंच गए थे। यहां उन्होंने कुछ स्थानीय संपर्कों के जरिए खुद को बचाने की योजना बनाई। जांच में खुलासा हुआ कि इस साजिश में इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की भी भूमिका थी।आरोप है कि यूपी पुलिस से बचाने के लिए दोनों आरोपियों को जानबूझकर आर्म्स एक्ट के फर्जी केस में फंसाने की योजना बनाई गई थी, ताकि उन्हें चंडीगढ़ जेल में रखा जा सके और वे लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।
अंदरूनी मिलीभगत का आरोप
पुलिस का कहना है कि यदि यह योजना सफल हो जाती तो आरोपी कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर गिरफ्तारी से बच सकते थे। साजिश सामने आते ही चंडीगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया।
अब प्रशासन से अभियोजन की अनुमति मांगे जाने के बाद यह मामला एक नया मोड़ ले चुका है। यदि मंजूरी मिलती है तो यह केस न केवल ठगी के आरोपियों, बल्कि उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ भी एक कड़ा कानूनी उदाहरण बन सकता है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और विभाग के भीतर भ्रष्टाचार या मिलीभगत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।