लुधियाना/यूटर्न/9 फरवरी। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा बुड्ढा दरिया में डेयरियों द्वारा गोबर डालने का खुलासा किया गया था। संत सीचेवाल के इसी सफाई अभियान की आड़ में अब निगम अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपए का खेल कर दिया गया है। दरअसल, निगम के बड़े साहब द्वारा कमीशन के चक्कर में करीब 22.17 करोड़ रुपए का गोबर टेंडर लगाकर बड़ा खेल कर डाला। जिसके चलते यह टेंडर शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि बड़े साहब व कुछ भ्रष्ट अफसरों ने मनमर्जी तरीके से चहेते ठेकेदार को यह टेंडर अलॉट करके पंजाब सरकार को करोड़ों का चूना लगा डाला। दरअसल, हर टेंडर की शर्तों को पूरा करना जरुरी होता है। इसी तरह इस टेंडर में भी दो ठेकेदार कंपनियों ने बीड की। लेकिन निगम ने एक कंपनी को शर्तों की रिक्वायरमेंट पूरी न होने की बात कहकर बाहर कर दिया। जबकि दूसरी कंपनी अलॉयस वेस्ट मेनेजमेंट को यह टेंडर दे दिया गया। जबकि शर्तें उक्त कंपनी द्वारा भी पूरी नहीं की गई थी। चर्चा है कि बड़े साहब द्वारा इस मामले में भी 10 प्रतिशत कमीशन का खेल करते हुए टेंडर अलॉट करवाया है। वहीं दूसरी बात यह कि निगम जहां गोबर से करोड़ों रुपए कमा सकता था, वहीं गोबर उठवाने के लिए ही करोड़ों रुपए बर्बाद कर रहा है।
बड़े साहब ने जल्दबाजी में लगाया टेंडर
चर्चा है कि बड़े साहब द्वारा यह टेंडर जल्दबाजी में लगाया है। क्योंकि एक तरफ पंजाब सरकार द्वारा अधिकारियों का तबादला कर दिया गया, जबकि दूसरी तरफ टेंडर से मिलने वाली कमीशन मरने का खतरा था। इसी के चलते बड़े साहब ने बिना सोचे समझे टेंडर जल्दबाजी में लगाया और पेमेंट अपनी जेब में डालकर चलते बने।
214 रुपए प्रति टन अलॉट किया टेंडर
अलॉयस वेस्ट मेनेजमेंट वहीं कंपनी है, जिसकी और से शहर से कूड़ा लिफ्टिंग किया जाता है। कंपनी द्वारा मोती नगर, ढोलेवाल, फिरोजपुर रोड, हंबड़ा रोड समेत अलग अलग इलाकों से कूड़ा लिफ्ट किया जाता है। कई किलोमीटर दूर से लिफ्टिंग करने पर निगम उसे 425 रुपए प्रति टन के हिसाब से पैसा अदा करता है। वहीं कंपनी ने हैबोवाल और ताजपुर रोड डेयरियों का जो गोबर उठाना है, वह सिर्फ एक या 2 किलोमीटर की दूरी पर गिराना है। उसके लिए निगम कंपनी को 639 रुपए प्रति टन के हिसाब से पैसे देगा। हैरानी की बात तो यह है कि कई किलोमीटर के पैसे कम और दो किलोमीटर के ज्यादा। यानि कि निगम अधिकारियों द्वारा 214 रुपए प्रति टन पैसे ज्यादा देकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
शर्ते पूरी न करने के बावजूद अलॉट किया टेंडर
बता दें कि निगम द्वारा पहली बार गोबर टेंडर लगाया गया तो ग्रोमैक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. और अलॉयंस वेस्ट मेनेजमेंट कंपनी द्वारा टेंडर डाला गया। जिस पर निगम द्वारा ग्रोमैक्स टेक्नोलॉजी की बीड यह कहकर कैंसिल कर दी कि उसे गोबर उठाने का एक्सपीरियंस नहीं है। बीड में एक कंपनी रहने के कारण दोबारा टेंडर लगा। दूसरी बार अकेले अलॉयंस कंपनी ने टेंडर डाला। निगम को चाहिए था कि अगर दूसरी बार किसी और कंपनी ने बीड नहीं की तो टेंडर 1-2 बार दोबारा कराया जा सकता था। वहीं शर्तों की बात करें तो अलॉयंस कंपनी ने भी कभी गोबर लिफ्टिंग नहीं किया, फिर वह भी टेंडर से बाहर होनी चाहिए थी। मगर फिर बड़े साहब ने स्कीम लगाई। बड़े साहब की अगुवाई में अधिकारियों ने सरकार के नियम को लागू किया। नियम मुताबिक अगर कंपनी का रेट एस्टिमेंट से कम हो तो सिंगल टेंडर भी दिया जा सकता है। आखिर अलॉयंस कंपनी को 2.074 प्रतिशत लैस पर टेंडर अलॉट हुआ।
पहले साल कम, फिर धीरे धीरे बढ़ेगा रेट
इस टेंडर मुताबिक अलॉयंस कंपनी को पहले साल 639 रुपए टन के मुताबिक पैसे दिए जाएंगे। फिर दूसरे साथ 674 रुपए 15 पैसे के मुताबिक पेमेंट होगी। वहीं तीसरे साल 711 रुपए 23 पैसे के मुताबिक पेमेंट अदायगी होगी। इस तरह तीन साल के लिए करीब 22.17 करोड़ रुपए में यह टेंडर दिया गया है। वहीं चर्चा है कि निगम अधिकारियों द्वारा जानबूझकर ऐसी शर्तें रखी जाती है, जो कोई ठेकेदार आसानी से पूरी न कर सके। लेकिन इस टेंडर में तो अलॉयंस कंपनी भी शर्ते पूरी नहीं करती, फिर भी टेंडर दे दिया।
गोबर से पैसा कमाने की जगह उजाड़ रहा निगम
वहीं पंजाब सरकार को लुधियाना कारपोरेशन पर खास फोक्स करने की जरुरत है। बेशक सरकार खुद ईमानदार है, लेकिन उनके कुछ भ्रष्ट अधिकारी सरकारी खजाना भरने की जगह उजाड़ने में लगे हैं। गोबर से जहां बाकी स्टेटों में खाद, पाउडर बना पैसा कमाया जा रहा है, वहीं पंजाब में सिर्फ गोबर उठाने को करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जबकि ठेकेदार को टेंडर में फायदा तो दिया ही जा रहा है, बाद में उसी गोबर को बेचकर दोगुना पैसा कमाएगा। सरकार को लुधियाना कारपोरेशन में समझदार अधिकारी तैनात करने की जरुरत है।
एसई कमीशन खेल वाले बड़े साहब दोबारा छाए
पिछले साल विजिलेंस द्वारा एसई संजय कंवर को 10 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। तब एसई ने पूछताछ में खुलासा किया था कि बड़े साहब के कहने पर उसने कमीशन मांगी थी, क्योंकि उनकी भी इसमें हिस्सेदारी थी। बता दें कि एसई कमीशन खेल में शामिल बड़े साहब की और से ही गोबर टेंडर में कमीशन का खेल किया गया है।
मंत्री अरोड़ा के संज्ञान में आया मामला
वहीं, इस मामले संबंधी कई संस्थाओं की और से लोकल बॉडी मंत्री संजीव अरोड़ा को गुप्त तरीके से पत्र भेजकर मामले संबंधी अवगत कराया है। जिसमें उन्होंने संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा बुड्ढा दरिया सफाई अभियान की आड़ में कारपोरेशन के अधिकारियों द्वारा गोबर टेंडर जरिए करोड़ों रुपए बर्बाद करने की विस्तार से जानकारी दी है। जिसके चलते जल्द मंत्री इस मामले में एक्शन ले सकते हैं।
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