प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया पर संस्कृत के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कथासरित्सागर’ का श्लोक साझा करते हुए कठिन परिस्थितियों में धैर्य और उत्साह बनाए रखने का संदेश दिया। महाकवि सोमदेव भट्ट रचित ग्रंथ के श्लोक का अर्थ बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दृढ़ बुद्धि वाले ज्ञानीजन संकट और कठिन समय में भी अपना उत्साह कभी नहीं खोते।
नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह एक संस्कृत श्लोक साझा कर कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, उत्साह और दृढ़ता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ ‘कथासरित्सागर’ का श्लोक पोस्ट किया और उसके माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत न हारने की सीख दी।
प्रधानमंत्री ने लिखा—
‘आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।
इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।।’’
इस श्लोक का भावार्थ है कि स्थिर और दृढ़ बुद्धि वाले ज्ञानीजन यह समझाते हैं कि संकट और कठिन समय आने पर भी बुद्धिमान व्यक्ति अपना उत्साह नहीं छोड़ते। परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री की पोस्ट में बताया गया कि इस प्रसिद्ध ग्रंथ के रचयिता महाकवि सोमदेव भट्ट हैं। कथासरित्सागर संस्कृत साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल है और इसमें जीवन, नीति तथा मानवीय व्यवहार से जुड़े अनेक प्रसंग मिलते हैं।
प्रधानमंत्री के दैनिक संस्कृत श्लोक साझा करने के क्रम में आज का संदेश भी संघर्ष और चुनौती के समय सकारात्मक सोच बनाए रखने पर केंद्रित रहा। उन्होंने श्लोक के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया कि मुश्किल दौर में उत्साह और दृढ़ संकल्प ही व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।