सितंबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्र संगठनों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। 2024 में निर्दलीय उम्मीदवार और 2025 में एबीवीपी की ऐतिहासिक जीत के बाद इस बार मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। करीब 16 हजार मतदाताओं में से एक-तिहाई नए वोटर हैं, जिनकी पसंद चुनावी समीकरण बदल सकती है। सभी छात्र संगठन नए विद्यार्थियों को अपने साथ जोड़ने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव को लेकर कैंपस में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाले चुनाव से पहले विभिन्न छात्र संगठनों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार चुनावी मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में छात्र राजनीति के पारंपरिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
वर्ष 2024 में पहली बार किसी निर्दलीय उम्मीदवार ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर छात्र राजनीति में नया अध्याय जोड़ा था। इसके बाद 2025 में पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाकर सभी को चौंका दिया। लगातार बदलते नतीजों ने इस बार सभी छात्र संगठनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी ताकत 5,000 नए मतदाता माने जा रहे हैं, जो पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। यूनिवर्सिटी में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 16,000 है, जिनमें लगभग एक-तिहाई नए छात्र हैं। ऐसे में नए मतदाताओं का रुझान किसी भी संगठन की जीत या हार तय कर सकता है।
इसी कारण सभी छात्र संगठन नए छात्रों को अपने साथ जोड़ने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विभागों के बाहर हेल्प डेस्क लगाए गए, जहां छात्रों को प्रवेश से जुड़ी जानकारी देने के साथ-साथ उनसे संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया। कई संगठनों ने नए विद्यार्थियों के लिए विशेष काउंसिलिंग कार्यक्रम भी आयोजित किए।
1977 में शुरू हुई प्रत्यक्ष चुनाव की परंपरा
पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनावों की शुरुआत 1965-66 में हुई थी। हालांकि, प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था 1977 में लागू की गई। छात्रसंघ में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए मतदान कराया जाता है।
कुछ कारणों से 1983 में छात्रसंघ चुनावों पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन 1997 में छात्रों के आंदोलन के बाद चुनाव प्रक्रिया फिर से शुरू हुई। तब से लेकर अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव आयोग और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार हर वर्ष चुनाव आयोजित करता आ रहा है।
चुनावी मैदान में सक्रिय हैं ये छात्र संगठन
इस बार चुनावी मैदान में कई प्रमुख छात्र संगठन सक्रिय हैं। इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (एसएफएस), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई), इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (इनसो), पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (पुसु), छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) और इंडियन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (आईएसओ) शामिल हैं।
कैंपस में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार का छात्रसंघ चुनाव केवल छात्र नेतृत्व चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह नए और पारंपरिक छात्र संगठनों के बीच राजनीतिक प्रभाव की भी बड़ी परीक्षा साबित होगा।