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**पांच एफआईआर से मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक पहुंचा मामला, करीब 300 खरीदार और निवेशक बताए जा रहे प्रभावित**
**129.80 करोड़ रुपये की जमीन कुर्क; ईडी का दावा—पहले रकम जुटाई, फिर परियोजना की जमीन तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर कागजों में लेन-देन को वैध दिखाने की कोशिश
**पांच एफआईआर से मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक पहुंचा मामला, करीब 300 खरीदार और निवेशक बताए जा रहे प्रभावित**
**129.80 करोड़ रुपये की जमीन कुर्क; ईडी का दावा—पहले रकम जुटाई, फिर परियोजना की जमीन तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर कागजों में लेन-देन को वैध दिखाने की कोशिश
नई दिल्ली/अहमदाबाद।** घर खरीदने वालों के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी **ईडी** की ताजा चेतावनी महज सामान्य सलाह नहीं है। इसके पीछे अहमदाबाद में सामने आया ऐसा कथित रियल एस्टेट नेटवर्क है, जिसमें जांच एजेंसी के अनुसार आकर्षक प्री-लॉन्च कीमत, **54 से 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न**, रेरा और दूसरी मंजूरियां “प्रक्रिया में होने” का भरोसा और बाद में परियोजना की जमीन ही दूसरे लोगों को हस्तांतरित किए जाने का तरीका सामने आया है। पांच पुलिस एफआईआर से शुरू हुई जांच अब पीएमएलए के तहत **129.80 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों की अस्थायी कुर्की** तक पहुंच चुकी है।
ईडी के अहमदाबाद जोन ने 14 अगस्त को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी, मैसर्स केशव नारायण ग्रुप और अन्य से जुड़े मामले में अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया। एजेंसी के मुताबिक जांच की बुनियाद अहमदाबाद के डीसीबी, सैटेलाइट, नवरंगपुरा और बोपल पुलिस थानों में दर्ज **पांच एफआईआर** हैं। कुछ मामलों में आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।
## पहले सपना बेचा, मंजूरियां बाद में मिलने का भरोसा
ईडी की जांच में सामने आया कथित तरीका रियल एस्टेट खरीदारों के लिए सबसे बड़ा अलार्म माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि योजनाओं को वैध और आकर्षक परियोजनाओं के तौर पर पेश कर फ्लैट और दुकानें प्री-लॉन्च कीमतों पर देने की पेशकश की गई। निवेशकों को बहुत ऊंचे रिटर्न का भरोसा भी दिया गया। लेकिन ईडी के मुताबिक जिन परियोजनाओं का प्रचार किया जा रहा था, उनके पास आवश्यक **गैर-कृषि अनुमति और रेरा पंजीकरण तक नहीं था।**
छारोड़ी परियोजना में करीब **250 खरीदारों और निवेशकों** से रकम लेने का दावा है, जबकि शेला के अक्षर अनंत परियोजना में ईडी ने **44 से अधिक खरीदारों और निवेशकों** से पैसा लिए जाने की बात कही है। एजेंसी का आरोप है कि बाद में न फ्लैट-दुकानें मिलीं और न ही जमा रकम वापस की गई।
## ‘रेरा प्रक्रिया में’ से शुरू हुआ खेल, जमीन हस्तांतरण पर खत्म
जांच दस्तावेज में छारोड़ी परियोजना का तरीका खास तौर पर सामने आया है। ईडी के मुताबिक खरीदारों को बताया जाता रहा कि रेरा पंजीकरण और गैर-कृषि अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन बाद में उसी परियोजना की जमीन केवल महेंद्रभाई पटेल, आशीष विष्णुभाई पटेल और अन्य के नाम बेचे या हस्तांतरित किए जाने का पता चला। एजेंसी का दावा है कि इससे पहले पैसा लगा चुके खरीदार बीच में फंस गए।
अक्षर अनंत में भी कथित तौर पर यही कहानी दूसरे तरीके से दोहराई गई। खरीदारों को समझौता ज्ञापन और अन्य दस्तावेज देकर परियोजना को वास्तविक दिखाया गया, लेकिन बाद में परियोजना बंद हो गई और जमीन दूसरे पक्षों के नाम हस्तांतरित कर दी गई। ईडी ने अपने बयान में पुरव रमेशचंद्र पटेल, दिपराजवीरसिंह विक्रमसिंह झाला और महेंद्रसिंह प्रद्युम्नसिंह चुडासमा के नाम जमीन हस्तांतरण के संदर्भ में दर्ज किए हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति का जमीन हस्तांतरण दस्तावेज में नाम आने मात्र से उसके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होता। मामले में ईडी की आगे की जांच जारी है।
## फरवरी की एफआईआर में 12.40 करोड़ रुपये और 47 खरीदारों का दावा
मामले की पुरानी कड़ियों की पड़ताल करने पर अक्षर अनंत परियोजना को लेकर फरवरी 2026 में दर्ज बोपल पुलिस केस भी सामने आता है। उस समय सामने आए एफआईआर संबंधी विवरण के अनुसार 14 मंजिला परियोजना में फ्लैट और दुकान के नाम पर **47 खरीदारों से कथित तौर पर 12.40 करोड़ रुपये** लिए जाने का आरोप लगाया गया था।
कई खरीदारों को समझौता ज्ञापन दिए गए, जबकि कुछ मामलों में ही बिक्री समझौते बनाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में परियोजना बंद होने और जमीन दूसरे लोगों को बेचने का आरोप लगा।
## दूसरी शिकायत में भी दस्तावेज न मिलने का आरोप
नामों की कड़ी केवल अक्षर अनंत तक सीमित नहीं दिखाई देती। अगस्त 2025 में सैटेलाइट पुलिस में दर्ज एक अन्य शिकायत में एक बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर ने रोनक सोनानी, विपुल गंगानी और एक ब्रोकर पर **13.52 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी** का आरोप लगाया था।
शिकायत के अनुसार अक्षर ओशन नाम की परियोजना में पहले पांच फ्लैट के लिए **8 करोड़ रुपये** दिए गए, लेकिन बिक्री दस्तावेज नहीं मिले। बाद में जमीन देने के नाम पर और रकम दिए जाने का भी आरोप लगाया गया। यह अलग पुलिस शिकायत है और आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी नहीं हुआ है।
## बैंक तक पहुंचा मामला, गिरवी संपत्ति बेचने का आरोप
मई 2026 में नवरंगपुरा पुलिस में दर्ज एक शिकायत ने मामले का एक और पहलू सामने रखा। आईसीआईसीआई होम फाइनेंस से जुड़े एक कर्मचारी की शिकायत के आधार पर सामने आए विवरण के मुताबिक अक्षर एलीसियम परियोजना की कुछ फ्लैट और दुकानों को गिरवी रखकर करीब **3 करोड़ रुपये का ऋण** लेने और बाद में बैंक की अनुमति के बिना कथित तौर पर इनमें से कुछ संपत्तियां बेचने का आरोप लगा।
यही वजह है कि ईडी की ताजा सलाह में केवल रेरा जांचने की बात नहीं कही गई, बल्कि खरीदारों को यह भी देखने के लिए कहा गया है कि जिस फ्लैट, दुकान या जमीन में वे पैसा लगा रहे हैं, वह किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास **गिरवी** तो नहीं है या उस पर कोई कानूनी विवाद अथवा अन्य देनदारी तो दर्ज नहीं है।
## कागजों में भुगतान दिखाकर जमीन हस्तांतरित करने का आरोप
मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सबसे गंभीर पहलू कथित जमीन हस्तांतरण से जुड़ा है। ईडी का दावा है कि कुछ संपत्तियां तीसरे पक्षों को **फर्जी बिक्री दस्तावेजों** के जरिये हस्तांतरित की गईं और पंजीकृत दस्तावेजों में ऐसे भुगतान विवरण दिखाए गए जिन्हें एजेंसी वास्तविक नहीं मानती। ईडी का आरोप है कि ऐसा लेन-देन को कानूनी रूप देने और अपराध से अर्जित संपत्ति को छिपाने के लिए किया गया।
इसी जांच के आधार पर ईडी ने छारोड़ी में **6,603.332 वर्ग मीटर**, शेला में **7,284 वर्ग मीटर** और कड़ी तहसील के जेसंगपुरा तथा अगोल में **30,798 वर्ग मीटर** जमीन अस्थायी रूप से कुर्क की है। यानी कुल करीब **44,685 वर्ग मीटर से अधिक जमीन**, जिसकी कीमत ईडी ने **129.80 करोड़ रुपये** आंकी है।
## ईडी ने बताए रियल एस्टेट धोखाधड़ी के खतरे के संकेत
इस मामले के बाद ईडी ने खरीदारों को साफ चेतावनी दी है कि भुगतान करने से पहले **रेरा पंजीकरण, सरकारी मंजूरियां, मालिकाना हक के दस्तावेज, जमीन का रिकॉर्ड और संपत्ति पर दर्ज देनदारियों** की जांच की जाए।
केवल ब्रोकर के मौखिक भरोसे, बुकिंग फार्म, नोटरी दस्तावेज या भविष्य में रजिस्ट्री करने के आश्वासन पर पैसा न दिया जाए। असामान्य रूप से बड़ी छूट, बहुत ऊंचे सुनिश्चित रिटर्न या निश्चित पुनर्खरीद का दावा भी खतरे का संकेत हो सकता है।
ईडी के मुताबिक अगर बिल्डर दस्तावेज दिखाने से इनकार करे, नकद भुगतान पर जोर दे, पंजीकृत समझौता टालता रहे, बुकिंग रद्द होने पर पैसा वापस न करे या परियोजना की जमीन किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने की कोशिश करे तो खरीदार को पुलिस, ईडी, रेरा प्राधिकरण या अन्य सक्षम विभागों तक मामला पहुंचाना चाहिए।
**मामले में ईडी की जांच अभी जारी है। सभी आरोप जांच एजेंसियों और दर्ज मामलों पर आधारित हैं तथा अदालत में अंतिम रूप से सिद्ध होना बाकी हैं।**