विधानसभा चुनाव अभी दूर, लेकिन लुधियाना साउथ और वेस्ट में राजनीतिक गतिविधियों ने पकड़ी रफ्तार; साउथ में रुचि बावा की कैंपेनिंग और पोस्टरों से बढ़ी चर्चाएं, वेस्ट में रविंदर घई समाजसेवा व जनमुद्दों के जरिए सक्रिय, जबकि संजीव अरोड़ा भी राजनीतिक चुनौतियों के बीच समर्थकों के साथ मजबूती से बने हुए हैं; अब बदलते समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हैं।
लुधियाना: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। अलग-अलग विधानसभा हलकों में राजनीतिक चेहरे एक्टिव होने लगे हैं। कोई कैंपेनिंग के जरिए लोगों के बीच पहुंच बना रहा है तो कोई समाजसेवा के जरिए अपना जनसंपर्क मजबूत कर रहा है।
खास तौर पर लुधियाना साउथ और लुधियाना वेस्ट में राजनीतिक गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
लुधियाना साउथ में रुचि बावा के पोस्टर लगने के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। रुचि बावा की ओर से कैंपेनिंग भी शुरू कर दी गई है। हालांकि इसे सीधे तौर पर चुनावी तैयारी माना जाए या नहीं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं लुधियाना वेस्ट में रविंदर घई भी लगातार समाजसेवा के कामों के जरिए लोगों के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं। वह मुख्यमंत्री को ई-मेल के जरिए समाज से जुड़े मुद्दों और लोगों की समस्याओं से अवगत करवाते रहते हैं और इन मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर लुधियाना वेस्ट की सियासत में संजीव अरोड़ा का नाम भी खास चर्चा में है। संजीव अरोड़ा को पंजाब के लोकप्रिय नेताओं में गिना जाता है। ईडी की कार्रवाई और लगातार सामने आई कानूनी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और अपना राजनीतिक स्टैंड कायम रखा।
समर्थकों का कहना है कि मुश्किल दौर में भी पार्टी के साथ खड़े रहने की वजह से संजीव अरोड़ा के प्रति अलग-अलग वर्गों में समर्थन और लोकप्रियता बनी हुई है।
उनके समर्थक उनकी राजनीतिक लड़ाई को पंजाबियों के इस जज्बे से जोड़कर देखते हैं—“सिर झुका नहीं सकते… सिर कटवा सकते हैं।”
फिलहाल 2027 की चुनावी तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन लुधियाना साउथ और वेस्ट में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने चर्चाओं को जरूर गर्म कर दिया है।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में इन हलकों के राजनीतिक समीकरण किस तरह बदलते हैं और 2027 की चुनावी दौड़ में कौन से चेहरे सबसे ज्यादा मजबूत होकर सामने आते हैं।