सूत्रों के अनुसार ग्रीन पार्क की संपत्ति, कथित हिस्सेदारी खरीदने में इस्तेमाल रकम के स्रोत और पुराने कर निर्धारण जांच के दायरे में; आयकर विभाग बैंक खातों के बड़े लेन-देन और घोषित आय के बीच कथित अंतर खंगाल रहा, कुछ पुराने आकलनों को धारा 148 के तहत दोबारा खोलने की प्रक्रिया की भी चर्चा; हालांकि जांच से जुड़े आरोपों पर एजेंसियों की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है।
लुधियाना/नई दिल्ली।* प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद अब *आयकर विभाग* ने भी विनय मित्तल और संजीव अरोड़ा से जुड़े मामले में अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग की यह जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मामले और जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेन-देन तथा दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों का दावा है कि आयकर विभाग की जांच के केंद्र में दिल्ली के *ग्रीन पार्क* स्थित एक आलीशान संपत्ति भी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संपत्ति में विनय मित्तल की कथित हिस्सेदारी खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था। इस संबंध में *बेनामी लेन-देन कानून* के तहत भी विभिन्न पहलुओं को खंगाले जाने की बात सामने आ रही है।
इसके अलावा विनय मित्तल, उनके कथित करीबी रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी कई *कागजी तथा मुखौटा कंपनियों* के पुराने कर निर्धारण भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, *आयकर अधिनियम की धारा 148* के तहत कुछ पुराने कर निर्धारण दोबारा खोलने और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा है।
जांच में बैंक खातों में हुए बड़े लेन-देन और आयकर विवरणियों में दिखाई गई आय के बीच कथित अंतर की पड़ताल की जा रही है। कुछ ऐसी कंपनियां और संस्थाएं भी जांच के दायरे में बताई जा रही हैं, जिनके खातों में करोड़ों रुपये का कारोबार हुआ, लेकिन आयकर विवरणियां दाखिल करने को लेकर सवाल उठे हैं।
सूत्रों का कहना है कि *प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और वित्तीय खुफिया इकाई* के बीच वित्तीय जानकारियां साझा की जा रही हैं। इसके साथ ही संबंधित *चार्टर्ड अकाउंटेंट और कथित सहयोगियों* की भूमिका भी जांची जा रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट अंकुर गर्ग से जुड़े कर लेखा-परीक्षण प्रतिवेदनों, बैलेंस शीट और अन्य अभिलेखों की भी पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल इन आरोपों और जांच के सभी बिंदुओं पर संबंधित एजेंसियों की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट सामने आना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन लेन-देन या संपत्तियों को लेकर आगे कानूनी कार्रवाई बनती है।